कांचीपीठ शंकराचार्य: हत्या के आरोप से लेकर अयोध्या मसले में जुड़ा नाम

नई दिल्ली। कांचीपीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का आज 82 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उन्हें पिछले महीने सांस लेने में दिक्कत की वजह से अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिसके बाद वह बिल्कुल स्वस्थ्य हो गए थे, लेकिन एक बार फिर से उन्हें शुगर की समस्या हुई, जिसकी वजह से उनका निधन हो गया। कांची पीठ हिंदू धर्म को मानने वालों के लिए काफी अहम है, ये पीठ दक्षिण भारत के तमिलनाडु के कांचीपुरम नगर में स्थित है। जिसके मुखिया शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती थे। जयेंद्र सरस्वती का ज्म 18 जुलाई 1935 को हुआ था। शंकराचार्य बनने से पहले उनका नामम सुब्रमण्यम महादेव था। उन्हें 22 मार्च 1954 को कांचीपीठ का शंकराचार्य बनाया गया था।

वेदों के ज्ञाता थे

वेदों के ज्ञाता थे

कांचीपीठ कई धार्मिक संस्थान का संचालन करती है, साथ ही शिक्षा संस्थान, अस्पताल, वृद्धाश्रम भी चलाती है। कांची कामकोटी पीठ के 69वें शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का इस पद पर आसीन होने से पहले नाम सुब्रमण्यम था। उन्हें वेदों का ज्ञाता माना जाता है। वर्ष 2003 जून में जयेद्र सरस्वती ने अपने कार्यकाल के 50 वर्ष पूरे कर लिए थे। इस दौरान एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जिसमे तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी हिस्सा लिया था। उन्होंने अपने भाषण के दौरान अयोध्या मसले पर शंकराचार्य की भूमिका की सराहना भी की थी।

हत्या के आरोप में फंसे थे

हत्या के आरोप में फंसे थे

वर्ष 2004 में शंकराचार्य पर शंकररामन की हत्या का आरोप लगा था। इस मामले में शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती और विजयेंद्र मुख्य आरोपी थे। हालांकि पुडुचेरी की अदालत ने इस मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। सत्र न्यायालय के जज सीएमस मुरुगन ने नौ साल के इंतजार के बाद इस मामले में फैसला सुनाया था। आपको बता दें कि 3 सितंबर 2004 को कांचीपुरम के वरदराजगोपल मंदिर के मैनेजर शंकररामन की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल 24 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिसमे से एक आरोप की मौत हो गई थी। अन्य 23 लोगो पर अलग-अलग धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।

कोर्ट ने किया था बरी

कोर्ट ने किया था बरी

इस मामले में जयेंद्र सरस्वती व उनके भाई रघु को भी सह आरोपी बनाया गया था। मामा 2009 से 2012 तक कोर्ट में चला, इस दौरान 189 लोगों से पूछताछ की गई, जिसमे से 83 गवाह अपने बयान से मुकर गए। आरोपियों के खिलाफ 120 बी आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया गया था। जबकि जयेंद्र सरस्वती और उनके भाई रघु को मामले में मुख्य आरोपी बनाया गया था।

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