'कर्नाटक के साथ अन्याय हो रहा है', टैक्स विवाद को लेकर CM सिद्धारमैया ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को करों के बंटवारे में न्याय की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि किसी को भी दुधारू गाय का पूरा दूध नहीं निकालना चाहिए, अन्यथा बछड़ा कुपोषित हो जाएगा। यहां श्री कांतीरवा स्टेडियम में 69वें राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर लोगों को संबोधित करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि कर्नाटक के साथ अन्याय हो रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य केंद्र को राजस्व के रूप में चार लाख करोड़ रुपये से अधिक का योगदान दे रहा है और यह महाराष्ट्र के बाद केंद्रीय कर राजस्व में दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता है।

CM Siddaramaiah

मुख्यमंत्री ने कहा, "भले ही हम चार लाख करोड़ रुपये से अधिक देते हैं, लेकिन हमें केवल 55,000 करोड़ रुपये से 60,000 करोड़ रुपये ही मिल रहे हैं। कन्नड़ लोगों को यह पता होना चाहिए। हमें अपने योगदान का केवल 14 से 15 प्रतिशत ही मिल रहा है।" उन्होंने कहा कि संघीय व्यवस्था के तहत, सिर्फ इसलिए कोई अन्याय नहीं होना चाहिए क्योंकि कर्नाटक एक प्रगतिशील राज्य है।''

सिद्धारमैया ने कहा, "सिर्फ इसलिए कि एक दुधारू गाय दूध दे रही है, हमें उसका पूरा दूध नहीं निकालना चाहिए। हमें बछड़े के लिए भी थोड़ा दूध छोड़ना चाहिए, नहीं तो वह कुपोषित हो जाएगा। यह बात किसी को कभी नहीं भूलनी चाहिए।"

सिद्धारमैया ने कहा- कन्नड़ भाषा पर हमें गर्व करना चाहिए

मुख्यमंत्री ने कन्नड़ पर गर्व करने और इसे यथासंभव दैनिक उपयोग में लाने पर जोर दिया। सिद्धारमैया ने कहा कि कर्नाटक में 200 से ज़्यादा भाषाएँ बोलने वाले लोग हैं, उन्होंने कहा, यहाँ के लोग चाहे जो भी भाषा बोलते हों या वे जिस भी जाति या धर्म से हों, वे सभी कन्नड़ हैं। उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा कि जो लोग हवा, पानी और भोजन का सेवन करते हैं, वे कन्नड़ हैं।

उन्होंने कहा कि कन्नड़ एक बहुत पुरानी भाषा है जिसका इतिहास 7,000 साल पुराना है। इसलिए, केंद्र ने भी इसे एक शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी है। सिद्धारमैया ने लोगों से अपील की कि उन्हें कन्नड़ भाषा का त्याग कभी नहीं करना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा, "मैं उदार होने का विरोध नहीं करता। मैं वास्तव में उदार होने का समर्थन करता हूँ, लेकिन अपनी भाषा का त्याग करके नहीं।" उन्होंने कहा, "हमारी भाषा के प्रति हमारा लगाव बहुत ज़्यादा नहीं होना चाहिए, लेकिन हमें अपनी भाषा के प्रति अपने गर्व को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। हम सभी को कन्नड़ प्रेमी होना चाहिए।"

सिद्धारमैया ने कहा कि कन्नड़ को आगे बढ़ाने के लिए, यहाँ रहने वाले लोगों को कन्नड़ बनना चाहिए। उन्होंने लोगों से कहा, "मैं कभी नहीं कहूँगा कि कोई और भाषा न सीखें। अपनी भाषाई संपदा को बढ़ाते रहें, लेकिन कन्नड़ में बोलना कभी न भूलें।" उन्होंने लोगों को याद दिलाया कि 1 नवंबर न केवल राज्य स्थापना दिवस है, बल्कि तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय डी देवराज उर्स द्वारा मैसूर राज्य को कर्नाटक नाम दिए जाने की वर्षगांठ भी है। इस अवसर पर 'हेसरायथु कर्नाटक, उसीरागली कन्नड़' (राज्य को कर्नाटक नाम मिला, अब कन्नड़ को सांस बनना चाहिए) थीम पर आधारित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया।

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