असम से AFSPA हटाने की तैयारी कर रहे हैं हिमंत बिस्वा सरमा, जानिए क्या है ये कानून?
असम में अफस्पा कानून को इस साल के अंत तक हटाया जा सकता है। इस बात को खुद सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है। आखिर क्या होता है ये अफस्पा।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अफस्पा कानून को लेकर बड़ा बयान दते हुए कहा कि हम 2023 के अंत तक असम से अफस्पा को पूरी तरह से हटाने का लक्ष्य बना रहे हैं। नवंबर में असम से अफस्पा को पूरे असम से हटाया जा सकता है। अब ऐसे में सवाल उठता है आखिर क्या है ये सशस्त्र बल विशेष शक्तियां कानून (AFSPA) ।
असम के आठ जिलों में अफस्पा कानून लगा हुआ है। साथ ही सीएम ने कहा कि राज्य की पुलिस को पूर्व सैन्य कर्मियों की मदद से प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही इस पहल के बाद असम पुलिस बटालियनों को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों से बदला जा सकेगा।
आखिर क्या है ये अफस्पा?
साल 1958 को बने अफस्पा यानी आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट (AFSPA) को पूर्वोत्तर के डिस्टर्ब इलाकों में लागू किया गया। ये कानून सुरक्षा बलों और सेना को कुछ विशेष अधिकार देता है। जहां पर अफस्पा लागू होता है, वहां सेना के पास काफी शक्तिशाली अधिकार होते हैं।
अफस्पा के तहत सेना को क्या अधिकार मिलते हैं?
- ये एक्ट जहां पर लागू होता है, वहां सेना किसी भी व्यक्ति को बिना किसी वारंट के गिरफ्तार कर सकती है, साथ ही गिरफ्तारी के दौरान वो किसी भी प्रकार के बल का इस्तेमाल कर सकती है।
- ऐसी किसी भी इमारत या ढांचे को गिराने का अधिकार होता है अगर वहां हथियार बंद हमले का संदेह हो।
- सेना के द्वारा चेतावनी के बाद भी वहां कोई कानून तोड़ता है या फिर अशांति फैलाता है तो उस पर मृत्युबल तक का प्रयोग किया जा सकता है।
- बिना किसी वारंट के घर या वाहन की तलाशी ली जा सकती है। साथ ही उचित बल का प्रयोग भी किया जा सकता है।
- सेना के काम में सिर्फ केंद्र सरकार ही दखल अंदाजी कर सकती है।
आखिर क्यो हो रही अफस्पा की आलोचना?
अफस्पा पर मानवाधिकार संगठन, अलगाववादी और राजनीतिक दल अक्सर सवाल उठाते रहते हैं। उनका मानना है कि सेना को ये अधिकार मिलने के बाद मौलिक अधिकारों का हनन होता है। साथ ही इस कानून के कुछ सेक्शन पर भी विवाद है।












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