CII चेयरमैन टीवी नरेंद्रन की मांग, पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम करें सरकार
नई दिल्ली, जून 20: कोरोना वायरस से देश में चल रहे उद्योग-धंधों पर बड़ा असर पड़ा है। इस बीच बढ़ती महंगाई ने भी जनता की कमर तोड़कर रख दी है। आए दिन बढ़ रहे पेट्रोल-डीजल के दामों ने आम आदमी से लेकर कारोबारियों पर बड़ा असर डाला हैं। इस बीच सीआईआई (भारतीय उद्योग परिसंघ) चेयरमैन, टाटा स्टील नवनिर्वाचित अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक टीवी नरेंद्रन ने शनिवार (19 जून) को कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें आम लोगों से लेकर उद्योगों को नुकसान पहुंचा रही हैं। लोगों और उद्योगों को राहत देने के लिए तेल की कीमतों में कटौती का यह सही समय है।

न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए नरेंद्रन ने कहा कि सरकार ने पिछले 3-4 सालों से पेट्रोल-डीजल पर टैक्स बढ़ाया है। अब केंद्र और राज्य सरकारों को देश के लोगों और उद्योग को राहत देने के लिए आगे आना चाहिए। केंद्र और राज्य सरकारों को चाहिए कि चर्चा करें और डीजल और पेट्रोल में दरों में कटौती के लिए कुछ संतुलन के साथ आगे आएं। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत लाया जाना चाहिए।
इसके अलावा टाटा स्टील के सीईओ सह एमडी टीवी नरेंद्रन ने कहा कि'मुझे नहीं पता कि समस्या क्या है, लेकिन केंद्र और राज्यों को पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के तहत लाने के लिए एक समझौता करना चाहिए। विमानन उद्योग का उदाहरण देते हुए नरेंद्रन ने कहा कि एयरलाइंस को एटीएफ पर कुल लागत का 60 प्रतिशत खर्च करना पड़ता है। और हम मांग करते हैं कि एटीएफ को भी जीएसटी के दायरे में लाया जाए। नौकरियों पर कोविड-19 के प्रभाव के बारे में बात करते हुए उन्होंने आंकड़ों का हवाला दिया कि ग्रामीण बेरोजगारी दर 8 प्रतिशत से बढ़कर 14 प्रतिशत हो गई है जो लगभग दोगुना है।
सीआईआई अध्यक्ष ने कहा कि आय, आजीविका और उपभोक्ता भावना पर कोरोना की दो लहरों का प्रभाव पड़ा है। घरेलू चिकित्सा खर्चों में वृद्धि के साथ कुछ समय के लिए उपभोक्ता मांग को प्रभावित करने की संभावना है। इसलिए सरकार को कुछ अल्पकालिक और केंद्रित जीएसटी दरों में कटौती से कुछ राहत देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि छह महीने के लिए उपभोक्ता वस्तुओं पर जीएसटी दर में 2-3 प्रतिशत की कटौती करके सरकार आम आदमी को किसी तरह की राहत दे सकती है, जिन्होंने अपनी नौकरी खो दी या फिर वेतन में कटौती का सामना कर रहे हैं।












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