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आर्चबिशप पर आरोप से गरमाई चर्च की राजनीति

By Bbc Hindi
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    कार्डिनल जॉर्ज अलेनचेरी
    A S Satheesh
    कार्डिनल जॉर्ज अलेनचेरी

    साइरो मालाबार का मेजर आर्चडायोसिस (केरल में बसे मालाबार सीरियाई कैथलिकों के चर्च से जुड़ा प्रशासन) भारत में कैथलिक ईसाइयों का दूसरा सबसे बड़ा अधिवेशन आयोजित कर रहा है.

    देश के दूसरे सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों से जुड़े इस संस्थान के अधिवेशन में पहली बार गहरा संकट देखने को मिल रहा है.

    इस संकट का अंदाज़ा इसी बात से लग सकता है कि साइरो मालाबार आर्चडायोसिस के मुख्य आर्चबिशप यानी कार्डिनल जॉर्ज अलेनचेरी पर ज़मीन ख़रीदफ़रोख़्त के मामले में आपराधिक आरोप लगाए गए हैं.

    हालांकि किसी ने भी उन पर इन सौदों से पैसे कमाने का आरोप नहीं लगाया है लेकिन आर्चडायोसिस के आधे से अधिक पादरियों ने उनके इस्तीफ़े की मांग की है.

    भारत में चर्च के इतिहास को देखें तो ईसाई धर्म से संबंधित मामलों पर नज़र रखने वाले कहते हैं कि कभी भी कार्डिनल के पद पर मौजूद किसी व्यक्ति समेत एरनाकुलम-अंगामली चर्च प्रशासन से जुड़े तीन आला अधिकारियों पर आपराधिक साज़िश, भरोसा तोड़ने, धोखाधड़ी, पैसों के हेरफेर से जुड़े आरोप नहीं लगाए गए हैं.

    बेसिलिका चर्च, एरनाकुलम
    A S SATHEESH
    बेसिलिका चर्च, एरनाकुलम

    मुद्दा

    ये मामला बीते सप्ताह के उस मामले से जुड़ा है जब केरल हाईकोर्ट ने एरनाकुलम-अंगामली चर्च प्रशासन से जुड़े मुख्य आर्चबिशप कार्डिनल जॉर्ज अलेनचेरी के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज करने वाले एक सदस्यीय बेंच के फ़ैसले पर रोक लगा दी थी. ये मामला प्रशासन से संबंधित मुद्दों से जुड़ा था.

    याचिकाकर्ता शाइन वर्गीस ने बीबीसी को बताया, "हमें आर्चडायोसिस के काम करने के तरीक़े में पारदर्शिता नहीं दिख रही. माना जाता है कि घर के बड़े पर कोई दाग़ नहीं लगना चाहिए, अगर आरोप हैं तो कार्डिनल को क़ानून का सामना करना चाहिए और ख़ुद पर लगे आरोपों को झूठा साबित करना चाहिए."

    वो कहते हैं, "ये किसी एक व्यक्ति से जुड़ा सवाल नहीं है, बल्कि पूरे साइरो-मालाबार समुदाय से जुड़ा है. सही मायनों में ज़मीन की इस ख़रीदफ़रोख़्त का असर पूरे ईसाई समुदाय पर भी पड़ा है. मैंने कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया क्योंकि जांच समिति की रिपोर्ट में चर्च के क़ानूनों और नागरिक क़ानूनों का उल्लंघन के बारे में गंभीर बातें कही गई हैं. कई सवाल हैं जिनके उत्तर अभी मिलने बाक़ी हैं."

    भारत में सीरियाई ईसाइयों के चार संप्रदाय रहते हैं - साइरो मालाबार, साइरो मलन्गारा, लैटिन और काननाय. इन संप्रदायों के लोग अमरीका, ब्रिटेन, कनाडा और दुनिया के कई और देशों में फैले हैं और एक अनुमान के अनुसार क़रीब 50 लाख लोग इन संप्रदायों से जुड़े हैं.

    लोगों का विरोध प्रदर्शन
    A S SATHEESH
    लोगों का विरोध प्रदर्शन

    साइरो-मालाबार आर्चडायोसिस से संप्रदाय के क़रीब छह लाख लोग जुड़े हैं. मुंबई आर्चडायोसिस के बाद ये संप्रदाय का सबसे बड़ा समुदाय माना जाता है और भारत के दक्षिणी राज्य केरल में मौजूद है.

    पादरी कुरियोकोस मंदादन कहते हैं, "ये सोच से जुड़ी समस्या नहीं बल्कि ज़मीन की खरीदफरोख़्त में पारदर्शिता से जुड़ी समस्या है. ये मुश्किल इसीलिए खड़ी हुई क्योंकि ज़मीन ख़रीदने के मामले में चर्च के कैनन क़ानूनों का पालन नहीं किया गया और ऐसा लगता है कि गुप्त सौदेबाज़ी की गई है. इस कारण नैतिकता से संबंधित मुद्दे उठाए जाने लगे."

    मई 2015 में आर्चडायोसिस ने फ़ैसला किया कि वो मट्टूर में 23.19 एकड़ की ज़मीन ख़रीदेगा और 59.90 करोड़ की रकम की इस ज़मीन को ख़रीदने के लिए 58.2 करोड़ का कर्ज़ा बैंक से लेगा. इस ज़मीन को मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए ख़रीदा जाना था लेकिन बाद में मेडिकल कॉलेज बनाने का इरादा छोड़ दिया गया.

    आर्चडायोसिस के मुख्य आर्चबिशप कार्डिनल जॉर्ज अलेनचेरी का घर
    A S SATHEESH
    आर्चडायोसिस के मुख्य आर्चबिशप कार्डिनल जॉर्ज अलेनचेरी का घर

    मुश्किल

    आर्चडायोसिस को अहसास हुआ कि कर्ज़ा चुकाने के लिए सालाना 6 करोड़ रुपए बैंक को देना उनके लिए मुश्किल हो रहा है. जून 2016 में फ़ैसला किया गया कि कोच्चि में मौजूद पांच ज़मीनें जो कुल 300 सेंट की हैं (1 सेंट यानी 430 वर्गफीट), उन्हें बेच दिया जाएगा. इसके लिए प्रति सेंट 9 लाख रुपए की क़ीमत तय की गई थी.

    इस सौदे से आर्चडायोसिस को 27.15 करोड़ रुपयों की आमदनी होती. लेकिन चर्च प्रशासन को मात्र 9.13 करोड़ रुपए ही मिले क्योंकि ज़मीन का सौदा करने वाले वर्गीस कुन्नल 18.01 करोड़ रुपए देने से मुकर गए. हाईकोर्ट में चले इस मामले में वर्गीस कुन्नल चौथे अभियुक्त हैं.

    आर्थिक समस्याओं के कारण वर्गीस कुन्नल पैसे नहीं दे पाए तो इसके बदले उन्होंने मुन्नार के कोट्टपडी और देवीकुलम में मौजूद 17 एकड़ की ज़मीन आर्चडायोसिस को देने का फ़ैसला किया. इस ज़मीन को ख़रीदने के लिए आर्चडायोसीस ने एक बार फिर बैंक से 10 करोड़ रुपयों का कर्ज़ लिया.

    जांच समिति को अपने जवाब में वित्तीय मामलों पर नज़र रखने वाले और मेजर आर्चबिशप के सलाहकार पादरी जोशी पुधुवा ने कहा, "इस कारण आर्चडायोसिस को नुक़सान नहीं पहुंचा जैसा कि आरोप लगाया जा रहा है."

    मेजर आर्चबिशप द्वारा बनाई गई इस जांच समिति ने पाया एक लाइसेंस प्राप्त सर्वेक्षक ने कोच्चि के ज़मीन की कीमत 15 लाख रुपए प्रति सेंट बताई थी. इसका मतलब था कि आर्चडायोसिस ने ज़मीन की क़ीमत तय करने के लिए जो समिति बनाई थी उसने 9 लाख प्रति सेंट की जो कीमत बताई थी वो ग़लत थी.

    जांच समिति ने पाया कि साजू वर्गीस कुन्नल को आर्चडायोसिस को 34.5 करोड़ रुपए देने थे. और तीन प्रामाणिक वैधानिक निकायों के तहत मौजूद कंसलटर्स फोरम, फाइनेंस कमेटी और क्यूरीआ को दिए प्रस्तावों में ज़मीन के सौदों के बारे में ग़लत जानकारी दे कर गुमराह करने की कोशिश की गई.

    जांच समिति के संयोजक पादरी बेनी मारांपरांपिल ने कहा, "कार्डिनल को ज़मीन के सभी सौदों के बारे में जानकारी थी और वो ही थे जिन्होंने ज़मीन के सौदे के लिए डीलर पुधुवा का नाम पेश किया था."

    मारांपरांपिल कहते हैं, "मार्च 2015 में आर्चडायोसिस के ऊपर 15.83 करोड़ रुपयों की देनदारी हो गई थी. नवंबर 2017 में ये बढ़ कर 86.83 करोड़ कर पहुंच गई."

    पादरियों का विरोध प्रदर्शन
    A S SATHEESH
    पादरियों का विरोध प्रदर्शन

    लेकिन साइयो माराबार कैथलिक एसोसिएशन के अध्यक्ष वीवी ऑगस्टिन कहते हैं, "आर्चडायोसिस का कोई नुक़सान नहीं हुआ है. ये बात सही है कि उनके ऊपर कर्ज़ का बोझ बढ़ा है लेकिन दूसरी तरफ़ देखें तो उन्हें अधिक ज़मीन मिली है. वर्गीस कुन्नल ने चर्च प्रशासन को जो ज़मीन दी है वो उस रकम से कहीं अधिक महंगी है जो आर्चडायोसिस ने उन्हें दी है."

    वो कहते हैं, "इसमें कोई धोखाधड़ी नहीं है. किसी ने कोई पैसा नहीं लिया है, ना तो कार्डिनल ने, ना ही किसी और ने. ये बस ऐसा है कि ज़मीन की सौदा करने वाला पैसे नहीं चुका पाया. चर्च की नैतिकता पर किसी तरह को कोई प्रभाव नहीं पड़ा है."

    लेकिन आर्चडायोसिस के भीतर इस मुद्दे पर उथल-पुथल इतनी बढ़ गई कि क़रीब 200 पादरियों ने कार्डिनल जॉर्ज अलेनचेरी से इस्तीफ़े की मांग की और प्रदर्शन किया.

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    प्रार्थना सभा
    A S SATHEESH
    प्रार्थना सभा

    जानकारों के अनुसार मुद्दा दो समूहों का है

    मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारों का कहना है कि ये दो दलों के बीच जारी गतिरोध का नतीजा है. प्रगतिशील माने जाने वाले एरनाकुलम समूह और पुराने तौर तरीक़ों में यकीन करने वाले चेंग्नासेरी समूह के बीच तनाव के कारण ये समस्या उत्पन्न हुई है क्योंकि कार्डिनल जॉर्ज अलेनचेरी चेंग्नासेरी समूह से हैं.

    दिल्ली में मौजूद विश्लेषक और धर्मिक मामलों से जुड़े प्रकाशन मैटर्स इंडिया के संपादक जोस कवि कहते हैं, "यह चर्च की असली राजनीति है. या तो आप कार्डिनल के समर्थक हैं या विरोधी हैं. यह वास्तव में बहुत दुखदायक स्थिति है. मुझे नहीं लगता कि इसका समाधान आर्चडायोसिस यानी चर्च प्रशासन के भीतर मिल सकता है. वैटिकन से या फिर कैथोलिक बिशप्स काउंसिल ऑफ इंडिया (सीबीसीआई) इस मामले में बाहरी हस्तक्षेप करें."

    बेसिलिका चर्च, एरनाकुलुम
    A S SATHEESH
    बेसिलिका चर्च, एरनाकुलुम

    अखिल भारतीय कैथलिक यूनियन के कानपुर-स्थित पूर्व अध्यक्ष छोटेभाई कहते हैं, "कोर्ट की एक सदस्यीय बेंच ने पहली नजर में कुछ ग़लत पाया था इसलिए भले ही ये कुछ आरोप ही हों लेकिन उन्हें पद से इस्तीफ़ा देना चाहिए और आरोपों के झूठ साबित होने के बाद ही अपने पद पर लौटना चाहिए."

    ट्रांसपेरेंसी फोरम के मैथ्यू कारोंडुकडाविल कहते हैं, "हमारे संप्रदाय में कई लोग हैं. अगर 200 से अधिक चर्चों में रविवार प्रार्थनासभा के दौरान ही इस बात की घोषणा कर दी जाती कि चर्च 300 सेंट की ज़मीन बेचना चाहता है तो संप्रदाय के लोगों ने ही बाज़ार की कीमतों पर ज़मीनें ख़रीद ली होतीं. और ये समस्या कभी सामने आती ही नहीं."

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    English summary
    Church politics over allegations of archbishop

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