ट्रेड वार से परेशान चीन विकास मॉडल बदलने को हुआ मजबूर, निर्यात की जगह घरेलू खपत पर जोर
बीजिंग। चीन अपने विकास मॉडल को 2021 में पूरी तरह बदलने जा रहा है। इसके तहत अब चीन निर्यात आधारित विकास मॉडल की जगह घरेलू खपत पर जोर देगा। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एशिया पैसिफिक इकॉनॉमिक कॉरपोरेशन (APEC) के सीईओ से संवाद के दौरान ये कहा है। जिनपिंग इस संवाद को वीडियो लिंक के जरिए संबोधित कर रहे थे।

जिनपिंग ने कहा कि "अगले साल से चीन एक आधुनिक समाजवादी देश बनने की दिशा में एक नई यात्रा शुरू करेगा। हम मुख्य रूप से घरेलू संचलन पर आधारित एक नए विकास प्रारूप को बढ़ावा देंगे। साथ ही एक दूसरे को मजबूत करते वाले घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्रसार पर काम करेंगे।"
चीन ने कहा रणनीतिक फैसला
जिनपिंग ने इसे वैश्विक परिस्थितियों में बदलाव के चलते लिया गया एक रणनीतिक फैसला बताया है। जिनपिंग ने कहा कि "विकास का नया मॉडल एक रणनीतिक फैसला है जो चीन में विकास की वर्तमान स्थितियों के अध्ययन, आर्थिक वैश्वीकरण और दुनिया में बदली परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया गया है।"
पिछले महीने की जिनपिंग की अध्यक्षता वाली कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) की प्रमुख बैठक आयोजित हुई थी। बैठक में राष्ट्रीय आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए 2021-25 की 14वीं पंचवर्षीय योजना के प्रस्तावों पर मुहर लगी थी। इस योजना में वर्ष 2035 की लंबी दूरी के लक्ष्यों को अपनाने की बात कही गई थी।
ट्रेड वार से परेशान है चीन
दुनिया में चीन आर्थिक मोर्चे पर कई महत्वपूर्ण देशों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है जिनमें सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति अमेरिका प्रमुख है। ऐसे में चीन ने 14वीं पंचवर्षीय में देश के घरेलू बाजार को मजबूत करके निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भरता कम करने को प्राथमिकता दी है। विजन 2035 एक दीर्घकालिक योजना है जिसमें शी जिनपिंग का दृष्टिकोण साफ झलक रहा है।
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के खिलाफ ट्रेड वार छेड़ रखी है जिसके चलते कई कंपनियों ने चीन से अपना बोरिया बिस्तर समेट लिया है। यही वजह है कि अब दुनिया की फैक्ट्री कहलाने का चीन का रुतबा कमजोर पड़ा है। ख्वावे और टिकटॉक जैसी कंपनियों पर प्रतिबंध के चलते चीन को बड़ा झटका लगा है। भारत ने भी चीन के कई उत्पादों पर प्रतिबंध लगाकर उसे कमजोर किया है।
जीडीपी में विदेशी व्यापार का योगदान घटना
चीन के इस निर्णय के पीछे देश की जीडीपी में निर्यात की निर्भरता कम होना भी वजह है। अपने संबोधन में शी ने कहा कि जीडीपी में विदेशी व्यापार का प्रतिशत 2006 में 67 प्रतिशत था जो कि 2019 में घटकर 32 प्रतिशत रह गया है। वहीं जीडीपी का अधिशेष 9.9 प्रतिशत से घटकर 1 प्रतिशत से कम पर पहुंच चुका है। वहीं 2007 के बाद वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद 7 सालों में चीन की जीडीपी में घरेलू मांग में 100 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
चीन की प्रति व्यक्ति जीडीपी 10 हजार अमेरिकी डॉलर से ऊपर है। वहीं मध्यम आय वाली आबादी 40 करोड़ के पार पहुंच गई है। कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों ने अपने अध्ययन में बताया है कि इस साल चीन का खुदरा बाजार आकार में छह ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। वर्तमान में अमेरिका के बाद चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।












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