LoC पर पाकिस्तानी सेना की मदद कर रहा है चीन, डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में भी सहायता
चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास पाकिस्तान को डिफेंस इफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में मदद कर रहा है। यही नहीं अधिकारियों के मुताबिक चीन पाकिस्तानी सेना को अनमैन्ड एरियल व्हीकल और कॉम्बैट एरियल व्हीकल भी उपलब्ध करा रहा है।
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अधिकारियों ने जो जानकारी दी है उसके अनुसार चीन एलओसी पर पाकिस्तान को संचार टावर लगाने और अंडरग्राउंड केबल बिछाने में भी सहायता दे रहा है। अधिकारियों के मुताबिक चीन का मकसद साफ है कि वह इसके जरिए पाकिस्तान के साथ अपनी दोस्ती भी बढ़ा रहा है।

नियंत्रण रेखा पर एसएच-15 भी देखे गए-अधिकारी
साथ ही साथ वह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में अपने तमाम प्रोजेक्ट, जैसे कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर और सड़क एवं जल विद्युत परियोजनाओं को भी सुरक्षित कर रहा है। अधिकारियों ने कहा है कि हाल ही में विकसित एसएच-15, जो कि एक 155 एमएम ट्रक पर लगी होवित्जर तोप है, उसे भी एलओसी पर कुछ जगहों पर देखा गया है। इसे पिछले साल पाकिस्तान दिवस पर देखा गया था।
चीन से किया है 236 एसएच-15 का करार
इसे 'मारो और भागो' तोपखाने के तौर पर जाना जाता है। लंदन स्थित डिफेंस मैगजीन जेन्स के मुताबिक पाकिस्तान ने चीन की कंपनी नॉर्थ इंडस्ट्रीज ग्रुप कॉर्पोरेशन लिमिटेड (Norinco) के साथ 236 एसएच-15 का करार किया था। 2022 की जनवरी में पहली खेप की डिलिवरी की गई थी।
नियंत्रण रेखा पर बहुत ही खतरनाक खेल खेल रहे हैं चीन-पाकिस्तान!
अधिकारियों का कहना है कि 2014 की तरह फॉर्वर्ड पोस्ट पर पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी तो नजर नहीं आई है, लेकिन कुछ इंटरसेप्ट चीनी सैनिकों और इंजीनियरों की मौजदगी की ओर इशारा जरूर करते हैं। जो कि एलओसी के आसपास इंफ्रास्ट्रक्चर तैयर कर रहे थे, जिसमें भूमिगत बंकर भी शामिल हैं।
पीओके में अपने हित की रक्षा में लगा है चीन-एक्सपर्ट
सूत्रों की कहना कि सेना आधिकारिक तौर पर इस मामले पर चुप है, लेकिन इंटेलिजेंस एजेंसियों को लगातार अपडेट कर रही है। एक्सपर्ट के मुताबिक चीनी सेना की मौजूदगी उसके 46 बिलियन डॉलर की सीपीईसी की वजह से है। जो कि पाकिस्तान के कराची बंदरगाह को चीन के शिंजिआंग प्रांत को जोड़ेगा। यह कॉरिडोर काराकोरम हाइवे से गुजर रहा है, जिसपर की चीन ने अवैध कब्जा कर रखा है।
पाकिस्तान की टेलीकॉम कंपनी पर भी चीन का कब्जा
अधिकारियों के मुताबिक चीन पीओके की लीपा घाटी में भी कुछ सुरंगें खोद रहा था। यह काराकोरम हाइवे तक हर मौसम में पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्ता बनाने की तैयारी है। गौरतलब है कि चीनी टेलीकॉम कंपनी ने 2007 में पाकिस्तानी टेलीकॉम कंपनी को खरीद लिया था और चाइना मोबाइल पाकिस्तान नाम की कंपनी बनाई थी। जो कि 100% चाइना मोबाइल कम्युनिकेशंस कॉर्पोरेशन की स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।
भारत हर नापाक हरकत का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार
भारत ने पहले से ही गिलगित और बाल्टिस्तान में चीनियों की मौजूदगी का जमकर विरोध किया है। अधिकारियों का कहना है कि भारतीय सेना सीमा पार से होने वाले किसी भी नापाक हरकत को ध्वस्त करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच 25 फरवरी, 2021 से सीजफायर है।
जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में चाइनीज स्टडीज के प्रोफेसर श्रीकांत कोंडापल्ली को लगता है कि चीन की ओर से पाकिस्तान को जो हथियारों की सप्लाई हो रही है, वह क्षेत्र में चीनी हितों की हिफाजत के लिए है। उन्होंने कहा, 'चीन ने पीओके में भारत की संप्रभुता संबंधी चिंताओं का उल्लंघन करते हुए 2014 में एक इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) शुरू किया था।'
उन्होंने कहा, 'काराकोरम हाइवे के सड़क विस्तार के अलावा, चीन ने अपनी हाइड्रो-इलेक्ट्रिसिटी प्रोजेक्ट और अन्य इंफ्रास्ट्रचर प्रोजेक्ट को आतंकवादी हमलों से बचाने के लिए पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में अनुमानित 36,000 'सुरक्षा गार्ड' भेजे हैं।'












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