12 अक्टूबर को भारत-चीन के बीच कोर कमांडर मीटिंग, उससे पहले PLA ने रखी एक शर्त
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर जारी तनाव को पांच माह पूरे हो चुके हैं। इस टकराव का अभी तक कोई हल नहीं निकल सका है और सर्दियों का आगाज बस कुछ ही दिनों में होने वाला है। 12 अक्टूबर को दोनों देशों के बीच सांतवें दौर की कोर कमांडर वार्ता होनी है। सूत्रों की मानें तो इस वार्ता से पहले चीन ने डिसइंगेजमेंट के लिए एक शर्त रखकर स्थिति को जटिल कर दिया है। चीनी जवान पैंगोंग त्सो के उत्तरी किनारे पर बने हुए हैं। दक्षिण में भारतीय सेना ने अपनी पकड़ को मजबूत किए हुए है।

पीएलए ने रखी एक शर्त
पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के कमांडर्स की तरफ से भारत के सामने नई शर्त रख दी गई है। इस नई शर्त के साथ ही उन्होंने स्थिति को और जटिल कर दिया है। पीएलए के कमांडर्स चाहते हैं कि इंडियन आर्मी पैंगोंग त्सो के दक्षिण में रेजांग ला और रेकिन ला रिज को खाली कर दे। इसके बाद चीन की सेना फिंगर 4 से चली जाएगी। इंडियन आर्मी के कमांडर्स का कहना है कि पीएलए को पहले फिंगर चार से पीछे हटना होगा और फिर उसे फिंगर आठ तक अप्रैल 2020 की यथास्थिति को बहाल करना होगा। पीएलए की तरफ से डिसइंगेजमेंट की जगह सर्दियों की तैयारियां कर ली गई हैं। चीन ने सोलर और गैस हीटेड ट्रूप कंटेनर्स के अलावा स्नो टेंट्स लगा लिए हैं। सरकार के अधिकारियों की तरफ से बताया गया है कि पीएलए सर्दियों के लिए तैयार हो रही है। एक गैस हीटेड कंटेनर चार से छह जवानों के लिए काफी होता है। इसके अलावा डेप्थ एरिया में नए अस्पताल की सुविधा भी शुरू कर दी गई है। यह सुविधा उन जवानों के लिए है जिन्हें ऊंचाई पर सांस लेने में तकलीफ हो रही है या फिर उन्हें स्वास्थ्य से जुड़ी दूसरी बीमारियां हो रही हैं।
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पीएलए ने की स्थिति को बदलने की कोशिश
भारत के टॉप आर्मी ऑफिशियल की मानें तो पीएलए की तरफ से पहले यथास्थिति को बदलने की कोशिशें की गई हैं। उन्हें पहले वहां से पीछे हटना होगा और भरोसा बहाल करना होगा। पीएलए ने एलएसी के आगे तक अपनी पोस्ट्स को बरकरार रखा है। सेना मान रही है कि अगर भारत ने रेजांग ला और रेकिन ला को खाली किया तो पीएलए यहां पर कब्जा कर लेगी। 29-30 अगस्त को हुए संघर्ष में भारत ने इन चोटियों पर अपनी पकड़ मजबूत की है। एक टॉप रक्षा अधिकारी की तरफ से कहा गया है कि अगर पीएलए, भारत की तरफ से किसी बोनस की उम्मीद कर रही है और चाहती है कि वह लद्दाख से पीछे हट जाए तो फिर उसे इंतजार करना होगा। पीएलए कमांडर-इन-चीफ के निर्देशों पर उन्होंने एलएसी की यथास्थिति में परिवर्तन किया है। उन्हें पहले यथास्थिति को बहाल करना होगा।

चीन की हर गतिविधि पर भारत की नजर
दोनों देशों के करीब 50,000 सैनिक इस समय लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर तैनात कर दिए हैं। 21 सितंबर को दोनों देशों के बीच छठें दौरे की कोर कमांडर वार्ता हुई थी। पहले की तरह इस बार भी वार्ता बेनतीजा खत्म हो गई। 12 अक्टूबर को दोनों देशों के बीच एक और दौर कोर कमांडर वार्ता होने वाली है। 29 और 30 अगस्त को भारत और चीन की सेनाओं के बीच पैंगोंग त्सो के दक्षिणी हिस्से में चुशुल सेक्टर में टकराव हुआ था। इसके बाद अगले 20 दिनों के अंदर भारत ने रणनीतिक चोटियों पर कब्जा कर लिया है। इस समय भारत की सेनाएं उत्तर से दक्षिण में कई अहम चोटियों जैसे मगर हिल, रेजांग ला, रेकिन ला और मुखपारी के साथ ही गुरुंग हिल पर भी तैनात हो चुकी हैं। इस पर तैनाती के साथ ही सेना चीन की किसी गतिविधि पर नजर रख सकती है।

भारत ने चीन को दिया दो टूक जवाब
छठें दौर की कोर कमांडर वार्ता के दौरान चीन की तरफ कहा गया था कि वह तब तक एलएसी पर डिसइंगेजमेंट पर कोई चर्चा नहीं करेगा जब तक कि भारत चोटियों को नहीं खाली करता है। भारत की तरफ से भी चीन को कहा गया है कि वह पहले डिएस्कलेशन का एक रोडमैप उसे दिया जाए ताकि यह पता लग सके कि पूर्वी लद्दाख में कैसे पीछे हटने वाली है। एक अधिकारी की तरफ से कहा गया है कि चर्चा को सिर्फ एक या दो जगहों तक ही सीमित रखा जाए जबकि एलएसी के हर हिस्से पर चीन की सेना का बड़ा जमावड़ा है। भारत ने देपसांग समेत टकराव वाले सभी इलाकों पर चर्चा करनी शुरू कर दी है। भारत की तरफ से कहा जा चुका है कि एलएसी पर डिसइंगेजमेंट चर्चा के दौरान इन पर भी बातचीत होनी चाहिए।












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