बच्चों और टीनएजर्स को क्यों हो रहा हार्ट अटैक? क्या पेरेंट के तौर पर आप भी कर रहे ये गलतियां
Teenagers dying due to heart attack: मध्यप्रदेश के छतरपुर से दिल को हिला देने वाली घटना सामने आई है, जिसमें एक दसवीं के स्टूडेंट सार्थक की स्कूल में अचानक हार्ट अटैक होने से मौत गई। छतरपुर के जाने माने बिजनेसमैन आलोक टिकरिया के बेटे सार्थक की मौत महर्षि विद्या मंदिर स्कूल में प्रार्थना करते समय स्कूल में ही हो गई।

सार्थक टिकरिया जो केवर दसवीं में पढ़ता था जिसकी उम्र 17 साल थी उसकी मौत से जहां उसके मां-बाप गहरे सदमें में आ गए वहीं सार्थक की माौत ने पेरेंन्टस की चिंता को बढ़ा दिया है।
इसके साथ ही ये सवाल फिर हो रहा है कि आखिर इतनी कम उम्र में हार्ट अटैक और उससे मौत क्यों की समस्या क्यों लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों की माने तो ये खतरा दिन प्रतिदिन और बढ़ता जाएगा। आइए जानते हैं कि आखिर ये खतरा क्यों बढ़ रहा है?
बच्चों की बिगड़ी हुई लाइफ स्टाइल
बच्चों के डॉक्टरो के अनुसार बच्चों में हार्ट अटैक की बढ़ रही समस्या का प्रमुख कारण उनकी लाइफ स्टाइल है। पहले की तुलना में बच्चे कम फिजिकल एक्टीविटी कर रहे हैं जिस कारण उनको हार्ट अटैक हो रहा है।
खान-पान
दूसरा कारण बच्चों की बिगड़ी हुआ खान-पान हैं। पौष्टिक भोजन और फल के बजाय बच्चे ज्यादा जंक फूड और अन्य अनहेल्दी फूड खाकर अपना वजन बढ़ा रहे हैं। मोटापा हार्ट अटैक के लिए बड़ा कारण बन रहा है।
बच्चों को जो पसंद आ रहा है उसे वो खाने को देते हैं। जैसे कुछ मांए अपने बच्चों के टिफिन में पूड़ी पराठा और जंक फूड रेगुलर देती हैं जिससे बच्चों का मोटापा बढ़ता है और जो छोटी सी उम्र में हार्ट अटैक जैसी जानलेवा बीमारी का को न्योता दे रहे हैं।
मोबाइल से घंटों चिपके रहना
कोरोना के समय से बच्चों की लॉकडाउन के समय हो रही ऑनलाइन क्लॉस के कारण मोबाइल यूज करने की आदत बहुत बढ़ चुकी है , कई बच्चें और टीन एजर्स मोबाइल एडिक्टेड हो चुके हैं जिस कारण उनका खेलना कूदना बिलकुल बंद हो चुका है।
पेरेंट के तौर पर कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती?
बच्चे और टीन एजर्स कम उम्र में हार्ट अटैक का शिकार बहुत हद तक मां बाप की लापरवाही की वजह से हो रहे हैं। कई पेरेंट बच्चों के सामने स्मोकिंग करते हैं, इसके अलावा उनकी खुद का खान-पान अनहेल्दी होता है। इतना ही नहीं कई पेरेंट बच्चों को एक्सरसाइज और खेल कूद के लिए प् प्रेरित भी नहीं करते हैं जिस कारण कम उम्र में बच्चों को शुगर और कालेस्ट्रोल बढ़ने की बड़ों वाली बीमारियां लग रही हैं और जिसके कारण हार्ट अटैक का वो शिकार हो रहे हैं।
बच्चें को दिल की बीमारी के क्या लक्षण
- खाना खाने में तकलीफ होना,
- थोड़ी दूर चलने पर हांफने लगता
- सांस लेने में तकलीफ
- शारीरिक विकास बाधित होना
- जोड़ो, छाती में दर्द महसूस होना
- चक्कर आना, सिर भारी रहना
- स्किन या होंठ के पास नीले निशान पड़ना
- बच्चों में ऐसे कोई भी लक्षण दिखने पर हार्ट संबंधी टेस्ट अवश्य करवाएं ।












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