छत्तीसगढ़: जांच कमेटी ने पूर्व सीएम अजीत जोगी को नहीं माना आदिवासी, छिन सकता है MLA पद
रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति ने पाया कि छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी अनुसूचित जनजाति के सदस्य के रूप में योग्य नहीं हैं। इस पैनल का सरकार ने हाईकोर्ट के निर्देश में किया था। इस उच्च स्तरीय पैनल मे सिफारिश की है जोगी के जाति संबंधी सभी प्रमाण पत्र निरस्त कर दिए जाएं और सरकार उनसे अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों को मिलने वाले सभी लाभों को भी वापस ले ले।

सदस्यता जाने का डर
कभी कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे जोगी ने कांग्रेस छोड़कर छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस बना ली है। वो मौजूदा समय में मरवाही सीट से विधायक हैं। जांच कमेटी द्वारा उन्हें अयोग्य माने जाने पर उनकी सदस्यता जा सकती है क्योंकि ये सीट अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित है और वो इसी कोटे से विधायक बने हैं। जोगी के आदिवासी स्टेटस का सवाल राज्य की स्थापना के बाद से ही विवादों में रहा है।

हाईकोर्ट के निर्देश पर हो रही थी जांच
अजीत जोगी के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने अदालत में आरोप लगाया कि उनका परिवार जाली दस्तावेजों के आधार पर आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ रहा है। उच्च न्यायालय में दो अलग-अलग याचिकाओं के बाद उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था। गौरतलब है कि 2017 में पैनल ने जोगी के सभी जाति प्रमाण पत्रों को निरस्त कर दिया था, लेकिन छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी और 21 फरवरी 2018 को, उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को फिर से डीडी सिंह की अध्यक्षता में समिति का पुनर्गठन करने का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट में देंगे चुनौती
अजीत जोगी को आदिवासी मानने से इनकार होने की खबर बाहर आते ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस जे के प्रदेश अध्यक्ष व अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी ने कहा कि छानबीन समिति ने कोरे कागजों में अपने दस्तखत करके मुख्यमंत्री को सौंप दिए थे। सुनवाई केवल नौटंकी थी, सभी कानूनी प्रक्रियाओं, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और न्यायालयों के दृष्टान्तों के विपरीत इस फैसले को हम उच्च और सर्वोच्च न्यायालय दोनों में चुनौती देंगे।












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