कहर बनकर टूटने वाले रायपुर के पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी का ये रहा हाल
रायपुर। आईएएस की नौकरी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए रायपुर के पूर्व कलेक्टर ओम प्रकाश चौधरी छत्तीसगढ़ की खरसिया सीट से चुनाव से हार गए हैं। भाजपा के फ्रेश चेहरे के रूप में चुनाव लड़ रहे ओपी चौधरी कांग्रेस पार्टी के उमेश पटेल से 8250 वोटों के अंतर हार गए हैं। हारने के बाद उन्होंने समर्थकों के साथ उमेश पटेल की ओर बढ़कर उन्हें गले लगाकर बधाई दी। मुख्यमंत्री के करीबी और विश्वसनीय अधिकारी के तौर पर जाने जानेवाले आईएएस अधिकारी ओपी चौधरी नौकरी से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हुए थे। बीजेपी से प्रत्याशी घोषित होने के बाद उन्होंने अपने एक एक भाषण में उन्होंने कहा था कि, मैं उन सब लोगों का साथ दूंगा, जो मेरे साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं और जो मेरा साथ नहीं दे रहे, उन पर कहर बनकर बरसूंगा।

ओपी चौधरी वर्ष 2005 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी थे
छत्तीसगढ़ से आने वाले चौधरी ने अपने पद से इस्तीफा देने के बाद कहा था कि वह आईएएस के रूप में अपने कार्यकाल से संतुष्ट है लेकिन नौकरशाही की अपनी सीमाएं होती है। उन्होंने कहा कि वह अपने लोगों और अपनी माटी की और सेवा करना चाहते हैं और इसलिए आईएएस की नौकरी छोड़ने का फैसला किया। ओपी चौधरी वर्ष 2005 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी थे।

नक्सल प्रभावित इलाके दंतेवाड़ा को एजुकेशन हब में बदल दिया था
दंतेवाड़ा में कलेक्टर रहते हुए उन्होंने नक्सल प्रभावित इलाके दंतेवाड़ा को एजुकेशन हब में बदल दिया था, जिसके चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वर्ष 2011-12 में उन्हें प्रधानमंत्री एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्मानित किया था। छत्तीसगढ़ बीजेपी ने विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस के गढ़ में सेंधमारी के लिए बड़ा दांव खेला था। चौधरी दरअसल अघरिया समुदाय से आते हैं, जिसका छत्तीसगढ़ में अच्छा वर्चस्व है।

ओपी हारा तो मैं मूंछ मुंडवा लूंगा….
भाजपा ने कांग्रेस के उमेश पटेल को हराने के लिए ओपी चौधरी का दांव खेला था जो बेकार हो गया। बीजेपी नेता डॉ. श्रवण श्रीवानी ने चुनाव के वक्त दावा किया था कि मैं दावे के साथ कहता हूं कि इस बार खरसिया विधानसभा का परिणाम ओपी चौधरी के पक्ष में होगा। अगर ओ पी चौधरी नहीं जीतते हैं और परिणाम विपरीत आते हैं तो मैं जीवन भर के लिए अपनी मूंछ मुंडवा लूंगा।












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