चंद्रयान-3: ISRO का है 'अगस्त' से खास रिश्ता, जानिए इतिहास रचने वाले संस्थान की ये कहानी
Chandrayaan 3 : चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग करने के बाद आज ISRO की चर्चा पूरे विश्व में हो रही है। चांद के साउथ पोल पर चंद्रयान 3 को उतारकर इसरो के वैज्ञानिकों ने सफलता की नई कहानी लिखी है। आपको बता दें कि भारत के इतिहास में अगस्त का महीना क्रांतिकारी माह के रूप में अंकित है।

गौरतलब है कि 9 अगस्त 1942 के दिन ही महात्मा गांधी ने 'भारत छोड़ो आंदोलन' की शुरुआत की थी। यही नहीं इसी महीने की 15 तारीख को भारत अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है। इस साल इंडिया ने अपन 77वां स्वतंत्रता दिवस सेलिब्रेट किया है।
विक्रम साराभाई का जन्म 12 अगस्त 1919 को हुआ था
इसलिए अगस्त का महीना भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है तो वहीं इसरो का भी अगस्त के महीने से खास रिश्ता है, जिसे कि हर भारतीय को जानना जरूरी है। आपको बता दें कि इसरो के संस्थापक विक्रम साराभाई का जन्म 12 अगस्त 1919 को अहमदाबाद में हुआ था।
' खुद का अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू करना चाहिए'
वो इसरो के पहले चेयरमैन थे और ये उन्हीं के प्रयास का नतीजा है कि इसरो की स्थापना हो पाई, वो कहते थे कि भारत में अपार प्रतिभाएं और क्षमता है इसलिए भारत को खुद का अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू करना चाहिए और इसी के चलते इसरो अस्तित्व में आया था।
इंडियन नेशनल स्पेस कमेटी फॉर स्पेस रिसर्च
उन्हीं की सलाह पर साल 1962 में भारत सरकार ने इंडियन नेशनल स्पेस कमेटी फॉर स्पेस रिसर्च यानि (INCOSPAR) की स्थापना की जिसका पुनर्गठन 15 अगस्त 1969 को हुआ और INCOSPAR उस दिन इसरो यानी कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान बन गया।
23 अगस्त पर हुई 'चंद्रविजय'
और इसी इसरो ने 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान 3 को चांद पर उतारकर अगस्त के महीने में अपनी सफलता का एक और अध्याय जोड़ दिया है। चंद्रयान-3 का ये मिशन वैज्ञानिक विक्रम साराभाई को ही समर्पित है और इसलिए ही इसके लैंडर का नाम 'विक्रम'है।
'करोड़ों भारतीयों की ओर से साराभाई को श्रद्धांजलि'
मालूम हो कि साल 2019 डॉ. साराभाई की जयंती के शताब्दी समारोह में पीएम मोदी ने भी कहा था कि 'जब 'विक्रम' लैंडर चंद्रमा पर उतरेगा तो वो ही सही मायनों में करोड़ों भारतीयों की ओर से साराभाई को श्रद्धांजलि होगी और आज उनकी ये बात सही साबित हो गई है।
इसरो ने किया Tweet
आज सुबह इसरो ने Tweet किया कि 'चंद्रयान -3 रोवर, मेड इन इंडिया, चांद के लिए बना है। रोवर लैंडर से बाहर निकलकर चांद की सतह पर पहुंच गया है, जल्द ही अपडेट साझा की जाएगी।'












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