Chandra Shekhar: क्या मायावती का विकल्प साबित होंगे चंद्रशेखर? UP में दलित पॉलिटिक्स को मिला नया लीडर
Chandra Shekhar vs Mayawati News: लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे आने के साथ ही यूपी की दलित राजनीति में चंद्रशेखर आजाद रावण के रूप में नया सूरज उगा है। दलितों का सबसे बड़ा चेहरा मायावती की बसपा पूरी तरह से जमींदोज हो गई। नगीना संसदीय क्षेत्र (आरक्षित) से चंद्रशेखर की जीत के बाद यूपी में दलित पॉलिटिक्स के नए नेता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
उत्तर प्रदेश में करीब 21 प्रतिशत दलित मतदाता हैं। बसपा का दलित वोटरों पर अच्छा खासा प्रभाव रहा, मगर लोकसभा चुनाव 2024 में बसपा खाता भी खोल सकी और चंद्रशेखर आजाद ने अपने दम पर बिजनौर जिले की नगीना लोकसभा सीट बड़े अंतर से जीत ली।

नगीना सीट पर सपा-कांग्रेस गठबंधन और बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए भी ताल ठोक रहा था, मगर चंद्रशेखर ने अकेले लड़ाई लड़ी और 151473 वोटों के बड़े अंतर से सीट जीत ली। चंद्रशेखर ने कुल 512552 वोट हासिल किए थे। दूसरे नंबर पर भाजपा के ओम कुमार रहे, जिन्हें 361079 वोट मिले।
चंद्रशेखर ने 4 साल पहले बनाई अपनी पार्टी
चंद्रशेखर आजाद की पार्टी का नाम आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) है, जिसकी स्थापना उन्होंने साल 2020 में की थी। एएसपी(केआर) के चंद्रशेखर की जीत के बाद यह चर्चा होने लगी है कि वे भविष्य में यूपी की दलित राजनीति में मायावती का विकल्प साबित हो सकते हैं। नया दलित चेहरा बनकर उभरे चंद्रशेखर दलिता के हक की आवाज मजबूती से उठाते रहे हैं।

साल 2024 में बसपा चारों खाने चित
बता दें कि लोकसभा चुनाव 2024 में मायावती की बसपा अकेले के दम पर उतरी थी, मगर नतीजे आए तो चारों खाने चित हो गई। साल 2014 के बाद 2024 में बसपा यूपी में खाता नहीं खोल पाई बल्कि जनाधार पर 10 प्रतिशत कम हो गया। बल्कि एक सीट पर दूसरे नंबर नहीं आई। दलित आबादी में 55 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला जाटव समाज भी हाथ से फिसल गया।
यूपी में दलित प्रभाव सीटें
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में नगीना समेत 20 सीटें ऐसी हैं, जहां 22 से 40 फीसदी तक दलित मतदाताओं का खासा प्रभाव है। ये वोटर किसी भी चुनाव में हार-जीत तय करते हैं। साल 2019 में नगीना सीट पर बसपा उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी।
कौन संभालेगा कांशीराम की सियासी विरासत?
दलितों के बड़े चेहरा कांशीराम ने साल 1984 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की स्थापना की थी। साल 2001 में कांशीराम ने मायावती को अपना राजनीतिक विरासत का उत्तराधिकारी घोषित किया था। कांशीराम के निधन के बाद मायावती जिस दलित वोट बैंक के दम पर यूपी की पहली महिला मुख्यमंत्री तक बनी,उसी में चंद्रशेखर ने सेंध लगाते नजर आ रहे हैं।












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