Cervical cancer: मानसिक रोग वाली महिलाओं को खतरा दोगुने से भी ज्यादा, शोध से पता चला कारण

जो महिलाएं मानसिक रोग से पीड़ित हैं या मादक द्रव्यों का सेवन करती हैं, उन्हें सर्वाइकल कैंसर होने का खतरा बहुत ज्यादा है। शोध के मुताबिक इसकी वजह इनमें स्क्रीनिंग की कमी है।

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महिलाओं के सर्वाइकल कैंसर को लेकर तीन साल पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी एक खास रणनीति बनाई थी। इसमें महिलाओं में इस रोग की रोकथाम के लिए नियमित तौर पर स्क्रीनिंग पर जोर दिया गया था। अब एक शोध हुआ है, जिसके नतीजें बहुत ही गंभीर हैं। इसमें कुछ खास तरह की परेशानी वाली महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर होने का बहुत ही ज्यादा खतरा बताया गया है। ऐसी महिलाओं में मानसिक रोग से पीड़ित महिलाएं शामिल हैं।

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इन महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर होने का खतरा दोगुना से ज्यादा
लैंसेट पब्लिक हेल्थ में छपी एक नई रिसर्च से पता चला है कि जो महिलाएं मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं, जिनमें न्यूरोसाइकिएट्रिक विकार है या जो मादक द्रव्यों का सेवन करती हैं, उन्हें सर्वाइकल कैंसर होने का खतरा दोगुने से भी ज्यादा है। शोध में इसका कारण ये बताया गया है कि ऐसी महिलाओं के स्त्री रोग संबंधी स्मियर टेस्ट करवाने की संभावना कम रहती है। स्वीडन के करोलिंस्का इंस्टिट्यूट की शोधकर्ताओं ने इस बात पर जोर दिया है कि सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए इन महिलाओं के बीच सक्रियता से काम करना महत्वपूर्ण है। इस रिसर्च में 1940 से 1995 के बीच जन्मीं 40 लाख से ज्यादा महिलाओं को शामिल किया गया था।

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स्क्रीनिंग नहीं होना बताया कारण
शोधकर्ताओं ने इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए इस तरह की बीमारियों वाली महिलाओं की तुलना उनके साथ की है, जिनमें ऐसी समस्याओं के लक्षण नहीं थे। करोलिंस्का इंस्टिट्यूट में इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायरमेंटल मेडिसिन में इस शोध से जुड़ी लेखकों में से पहली केजिया हू ने कहा है, 'हमारे नतीजों से पता चलता है कि ऐसी बीमारियों वाली स्क्रीनिंग कार्यक्रमों में शायद ही कभी भाग लेती हैं, जबकि उनके गर्भाशय ग्रीवा में घाव की आशंका ज्यादा होती है। ' उन्होंने कहा कि 'इसलिए हमने पाया कि उनमें सर्वाइकल कैंसर होने का खतरा दोगुना रहता है।'

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    मादक द्रव्य का इस्तेमाल सबसे ज्यादा खतरनाक
    रिसर्च के मुताबिक ऐसी महिलाओं में भी सबसे ज्यादा सर्वाइकल कैंसर का खतरा उन्हें है, जो मादक द्रव्यों की गिरफ्त में हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि मानसिक बीमारियों से पीड़ित महिलाओं को नियमित स्त्री रोग संबंधी स्क्रीनिंग के लिए जागरूक किया जाना चाहिए। शोध पत्र की एक लेखक और करोलिंस्का इंस्टिट्यूट के डिपार्टमेंट ऑफ लैबोरेटरी मेडिसिन की सीनियर रिसर्चर करिन संडस्ट्रॉम ने कहा है कि 'इससे उनमें कैंसर का खतरा कम हो सकता है।' 'इसी तरह यदि स्वास्थ्यकर्मी ऐसी मरीजों के कैंसर जोखिमों के प्रति ज्यादा जागरूक रहेंगे तो वे रोकथाम के उपाय अपना सकते हैं।' ऐसे प्रयासों से इन महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर होने का खतरा कम हो सकता है। हालांकि, इस शोध में एक कमी यह रह गई कि शोधकर्ताओं को सर्वाइकल कैंसर होने के कुछ और खतरों का पूरा डेटा उपलब्ध नहीं हो पाया। जैसे कि धुम्रपान,हार्मोनल गर्भ निरोधकों का इस्तेमाल और यौन रोग।

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    विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बनाई वैश्विक रणनीति
    मई, 2020 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने महिलाओं की स्वास्थ्य समस्या से सर्वाइकल कैंसर को दूर करने के लिए एक वैश्विक रणनीति को मंजूरी दी थी। इस रणनीति के तहत इस बात की आवश्यकता बताई गई है कि 35 साल की उम्र से पहले एक बार और 45 की आयु से पहले दो बार इस बीमारी की स्क्रीनिंग जरूर की जाए। हू ने कहा कि 'अगर हम सर्वाइकल कैंसर को खत्म करने में सफल होना चाहते हैं तो हमारे शोध ने ज्यादा जोखिम वाले समूह की पहचान की है, जिनपर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।' (इनपुट-पीटीआई) (तस्वीरें सांकेतिक- कैंसर के खिलाफ अभियानों से जुड़ी हुई )

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