असम में NRC अपडेट करने के लिए मिला छह महीने का और समय, अब अंतिम तारीख 30 जून
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) को अपडेट करने के लिए चल रही प्रक्रिया को पूरा करने के लिए छह महीने का और समय दे दिया है। अब एनआरसी की प्रक्रिया को पूरा करने की नई तारीख 30 जून होगी। भारत के महापंजीयक शैलेश ने एक अधिसूचना में कहा कि एनआरसी में असम के नागरिकों की सूची बनाने की प्रक्रिया 31 दिसंबर, 2018 की निर्धारित तारीख के भीतर पूरी नहीं हो सकी जिसके कारण यह फैसला लिया गया है।

भारत के महापंजीयक शैलेश द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है, ''केंद्र सरकार इसे जनहित में आवश्यक तथा व्यवहारिक मानती है कि राष्ट्रीय नागरिक पंजी, 1951 के अद्यतन के संबंध में इस गणना को 30 जून 2019 तक पूरा कर लिया जाए।'' एनआरसी का मसौदा 30 जुलाई को प्रकाशित हुआ था और कुल 3.29 करोड़ आवेदकों में से 2.9 करोड़ लोगों के नाम इसमें शामिल किए गए थे। एनआरसी के मसौदे से 40 लाख लोगों को बाहर रखने को लेकर काफी विवाद पैदा हुआ था।
जानिए क्या है NRC
एनआरसी से पता चलता है कि कौन भारतीय नागरिक है और कौन नहीं। जिनके नाम इसमें शामिल नहीं होते हैं, उन्हें अवैध नागरिक माना जाता है। इसके हिसाब से 25 मार्च, 1971 से पहले असम में रह रहे लोगों को भारतीय नागरिक माना गया है। असम पहला राज्य है जहां भारतीय नागरिकों के नाम शामिल करने के लिए 1951 के बाद एनआरसी को अपडेट किया जा रहा है। एनआरसी का पहला मसौदा 31 दिसंबर और एक जनवरी की रात जारी किया गया था, जिसमें 1.9 करोड़ लोगों के नाम थे।
असम में बांग्लादेश से आए घुसपैठियों पर बवाल के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एनआरसी अपडेट करने को कहा था। पहला रजिस्टर 1951 में जारी हुआ था। ये रजिस्टर असम का निवासी होने का सर्टिफिकेट है। इस मुद्दे पर असम में कई बड़े और हिंसक आंदोलन हुए हैं। 1947 में बंटवारे के बाद असम के लोगों का पूर्वी पाकिस्तान में आना-जाना जारी रहा। 1979 में असम में घुसपैठियों के खिलाफ ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन ने आंदोलन किया। इसके बाद 1985 को तब की केंद्र में राजीव गांधी सरकार ने असम गण परिषद से समझौता किया। इसके तहत 1971 से पहले जो भी बांग्लादेशी असम में घुसे हैं, उन्हें भारत की नागरिकता दी जाएगी।












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