कांग्रेस का आरोप, केंद्र के प्रस्तावित कानूनों का उद्देश्य विपक्षी मुख्यमंत्रियों को कमजोर करना है
कांग्रेस पार्टी ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर विपक्ष के मुख्यमंत्रियों को गिरफ्तार करने और हटाने में सक्षम बनाने वाले कानूनों को पेश करके विपक्षी दलों को अस्थिर करने की योजना बनाने का आरोप लगाया है। यह आरोप उन रिपोर्टों के बाद आया है जिनमें कहा गया है कि सरकार संसद में तीन विधेयक पेश करने का इरादा रखती है जिनका उद्देश्य प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री या राज्य मंत्री को हटाना है, जब उन्हें गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार या हिरासत में लिया जाता है।

वरिष्ठ कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रस्तावित कानून की आलोचना करते हुए कहा कि यह उन विपक्षी नेताओं को निशाना बनाता है जिन्हें चुनावी तौर पर हराया नहीं जा सकता है। सिंघवी ने गिरफ्तारी के लिए दिशानिर्देशों की कमी पर चिंता व्यक्त की और स्थिति को एक दुष्चक्र के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल का लक्ष्य पक्षपाती केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग करके विपक्षी मुख्यमंत्रियों को गिरफ्तार करना है, जिससे उनके नेतृत्व को अस्थिर किया जा सके।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने तर्क दिया कि ये विधेयक बिहार में राहुल गांधी की वोट अधिकार यात्रा से जनता का ध्यान भटकाने की एक रणनीति है। गोगोई ने दावा किया कि गृह मंत्री अमित शाह के विधेयक गांधी के अभियान से ध्यान हटाने का प्रयास हैं। उन्होंने इस विचलन रणनीति के हिस्से के रूप में सीएसडीएस-भाजपा आईटी सेल से जुड़ी पिछली घटनाओं का भी हवाला दिया।
प्रस्तावित कानून का विवरण
केंद्र सरकार तीन विशिष्ट विधेयक पेश करने की योजना बना रही है: केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक 2025, संविधान एक सौ तीसवां संशोधन विधेयक 2025 और जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उम्मीद है कि वे इन विधेयकों को आगे विचार के लिए संसद की एक संयुक्त समिति को संदर्भित करने का प्रस्ताव देंगे।
कानूनी ढांचा और निहितार्थ
केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक 2025 केंद्र शासित प्रदेश अधिनियम, 1963 में एक कमी को दूर करने का प्रयास करता है। वर्तमान में, ऐसे किसी प्रावधान का अभाव है जो गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए मुख्यमंत्री या मंत्री को हटाने का प्रावधान करे। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य इस विधायी शून्य को भरना है।
इन विधेयकों की शुरूआत ने राजनीतिक हलकों में महत्वपूर्ण बहस छेड़ दी है, विपक्षी दल उन्हें वास्तविक कानूनी सुधारों के बजाय राजनीतिक पैंतरेबाजी के उपकरणों के रूप में देख रहे हैं। इस विधायी प्रक्रिया के परिणाम का पूरे भारत में राजनीतिक गतिशीलता पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।
With inputs from PTI










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