Manual Scavenging: केंद्र सरकार के पैनल का दावा, देश हाथ से मैला सफाई की प्रथा से मुक्त

Manual Scavenging: देश में 520 जिलों ने हाथ से मैला साफ करने की प्रथा को खत्म करने की बात कही है। लेकिन सामाजिक अधिकारिता एवं न्याय मंत्रालय की ओर से गठित केंद्रीय निगरानी समिति ने दावा किया है कि देश में अब हाथ से मैला साफ करने की प्रथा पूरी तरह से खत्म हो गई है।

अहम बात यह है कि देश के 766 जिलों में से सिर्फ 520 जिलों ने ही खुद को हाथ से मैला सफाई करने की प्रथा से मुक्त घोषित किया है जबकि 246 जिलों ने अभी तक अपनी रिपोर्ट नहीं जमा की है। लिहाजा केंद्रीय समिति के दावे पर सवाल खड़ा हो रहा है।

Manual Scavenging:

सामाजिक अधिकारिता एवं न्याय मंत्रालय द्वारा निगरानी समिती की 8वीं बैठक में यह बात सामने आई है। बैठक में शामिल एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हम संबंधित राज्यों से बाकी के जिलों की रिपोर्ट को सौ्ंपने के लिए कहेंगे। अगस्त 2023 तक भारत में हाथ से मैला ढोने और साफ करने की प्रथा से मुक्त कराने का लक्ष्य रखा गया है।

मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि दिसंबर 2022 तक कुल 48 लोगों की सीवर सफाई के दौरान मौत हो गई है। 2021 में 49 लोगों की, 2020 में 19, 2019 में 117 लोगों की मौत हो गई थी।

इस लक्ष्य के अनुसार कोई भी सफाई कर्मचारी बिना जरूरी मशीन और किट के सीवर में सफाई के लिए नहीं उतरेगा। इसके लिए उसे तकनी की मदद मुहैया कराई जाएगी। इस योजना को नमस्ते योजना का नाम दिया गया है। इसके तहत कर्मचारियों को प्रशिक्षण देकर उन्हें इन मशीनों और तकनी का इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी जाएगी।

मध्य प्रदेश के 52 जिलों में से 36 जिलों में सफाई कर्मचारियों को सक्षम बनाया जा चुका है। वहीं महाराष्ट्र में 36 में से 21 जिलों ने अभी अपनी रिपोर्ट नहीं दी है। गौर करने वाली बात है कि देश में मैनुअल स्कैवेंजर्स को रोजगार के तौर पर नहीं स्वीकार किया जा सकता है। इसपर देश में रोक लगा दी गई है। इसके लिए हर राज्य में सफाई कर्मचारियों के पुनर्वास पर जोर दिया जा रहा है।

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