सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के प्रस्तावित 10 जजों के नामों को नहीं मिली हरी झंडी, केंद्र ने किया खारिज: सूत्र
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम (Supreme Court Collegium) की तरफ से सिफारिश किए गए 10 जजों के नामों को केंद्र सरकार(Central government) से मंजूरी नहीं मिली है।
Supreme Court Collegium: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की तरफ से पदोन्नति के लिए सिफारिश किए गए 10 न्यायाधीशों के नामों को केंद्र सरकार से हरी झंडी नहीं मिली है। सूत्रों का कहना है कि कॉलेजियम द्वारा दोहराए गए कुछ नामों को भी वापस कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम से उन 20 फाइलों पर दोबारा विचार करने को कहा है, जो हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति से जुड़ा हैं। दरअसल, 25 नवंबर को लौटाई गई फाइलों में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीएन किरपाल के बेटे सीनियर एकवोकेट सौरभ किरपाल का नाम भी शामिल है।

इन 20 फाइलों में से 11 नई फाइलें थी और 9 सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा दोबारा भेजी गई थीं। हाल ही में एनडीटीवी से बात करते हुए अधिवक्ता सौरभ किरपाल ने कहा था कि उनका मानना है कि उनकी उपेक्षा की वजह उनका यौन रुझान है। एडवोकेट किरपाल की 2017 से पदोन्नति रुकी हुई थी। ऐसे में उन्होंने बताया, "इसका कारण मेरी कामुकता है, मुझे नहीं लगता कि सरकार खुले तौर पर समलैंगिक व्यक्ति को बेंच में नियुक्त करना चाहती है।"
नियुक्तियों पर अदालत द्वारा अनिवार्य समय सीमा की "जानबूझकर अवज्ञा" का आरोप लगाते हुए शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की गई है, जिस पर वर्तमान में दो-जजों की बेंच सुनवाई कर रही है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक नियुक्तियों के लिए केंद्रीय मंजूरी में देरी को लेकर अपनी नाराजगी स्पष्ट कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार इस बात से नाखुश है कि राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग(NJAC) ने संवैधानिक मस्टर पास नहीं किया। जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एएस ओका की बेंच ने कहा, "कृपया इसका समाधान करें और हमें इस संबंध में न्यायिक निर्णय न लेने दें।"
आपको बता दें कि केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मामले पर अपना रुख साफ कर दिया है, दो दिन पहले रिजिजू ने कहा था कि कॉलेजियम नहीं कह सकता कि सरकार उसकी ओर से प्रस्तावित हर नाम फौरन मंजूर करे। फिर तो उन्हें खुद नियुक्ति कर लेनी चाहिए।












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