CEC पर विपक्ष की महाभियोग की तैयारी, जानिए संविधान में क्या है इसकी प्रक्रिया और कितना मुश्किल है हटाना?
India Bloc Plans CEC Impeachment: देश की राजनीति इन दिनों SIR और कथित तौर पर वोट चोरी के मुद्दे के साथ चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच चल रहे टकराव को लेकर गरमा गई है। विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar ) के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव (CEC impeachment process India) लाने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।
यह कदम कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हालिया आरोपों के बाद तेज हुआ है, जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग पर भाजपा के पक्ष में बड़े पैमाने पर वोटर फ्रॉड और धांधली करने का आरोप लगाया।

राहुल गांधी के आरोपों और चुनाव आयोग की कड़ी प्रतिक्रिया ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नए सियासी संग्राम को जन्म दे दिया है। इन सब के बीच यह जानना जरूरी है कि महाभियोग प्रस्ताव है क्या और इसकी क्या है पूरी प्रक्रिया...
Rahul Gandhi voter fraud allegations: क्या हैं राहुल गांधी के आरोप?
राहुल गांधी ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि महाराष्ट्र, कर्नाटक और हरियाणा में बड़े पैमाने पर "वोट चोरी" हुई है। उन्होंने सबसे बड़ा उदाहरण बेंगलुरु सेंट्रल के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र का दिया, जहाँ कथित तौर पर 1,00,250 फर्जी वोट दर्ज किए गए। राहुल का आरोप है कि यह हेरफेर भाजपा को जीत दिलाने के लिए की गई और चुनाव आयोग ने सत्ता पक्ष से मिलीभगत कर वोटर डेटा में हेरफेर किया।
Rahul Gandhi के आरोपों पर CEC का पलटवार
17 अगस्त को प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने राहुल गांधी के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ये आरोप "बेहूदा, निराधार और संविधान का अपमान" हैं। कुमार ने राहुल से चुनौती दी कि या तो वे शपथपत्र देकर सबूत पेश करें या फिर पूरे देश से माफी मांगें।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा -"बार-बार झूठ बोलने से कोई सच नहीं बन जाता। सूरज हमेशा पूरब से ही उगता है, पश्चिम से नहीं, चाहे कोई कितनी भी बार कुछ भी कहे।"
इस पर राहुल गांधी ने भी पलटवार करते हुए चुनाव आयोग पर चयनात्मक कार्रवाई का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब वे सवाल उठाते हैं तो उनसे हलफनामा मांगा जाता है, लेकिन जब भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर वही आरोप लगाते हैं तो उनसे कुछ नहीं पूछा जाता।
विपक्ष का समर्थन
राहुल गांधी के आरोपों के बाद विपक्षी दल उनके साथ खड़े नजर आए। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि CEC का बयान किसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्था प्रमुख का नहीं, बल्कि भाजपा प्रवक्ता का लग रहा था। RJD सांसद मनोज झा ने चुनाव आयोग पर "जलते सवालों से बचने" का आरोप लगाया। वहीं JMM सांसद महुआ माजी ने चुनाव आयोग से मांग की कि वह राहुल द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों की सत्यता पर जवाब दे।
राहुल के आरोपों का आधार क्या है?
राहुल गांधी ने 7 अगस्त को कांग्रेस का शोध प्रस्तुत किया था। इसमें कहा गया कि:
- वोटर लिस्ट में डुप्लीकेट नाम मौजूद थे।
- कई वोटरों के गलत पते दर्ज थे।
- एक ही पते पर 80 से ज्यादा वोटरों का पंजीकरण मिला।
- चुनाव आयोग CCTV फुटेज सिर्फ 45 दिन तक सुरक्षित रखता है, जिससे साक्ष्य नष्ट हो जाते हैं।
CEC impeachment process India: CEC को हटाने के लिए महाभियोग की प्रक्रिया क्या है?
महाभियोग की प्रक्रिया भारत के संविधान में बहुत स्पष्ट रूप से तय है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने जैसी ही होती है। आइए आसान भाषा में समझते हैं...
प्रस्ताव पेश करना
- सबसे पहले संसद के किसी एक सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में महाभियोग प्रस्ताव पेश किया जाता है।
- इस प्रस्ताव में हटाने के कारण (Misbehaviour या Incapacity) लिखे होते हैं।
विशेष बहुमत की जरूरत
- प्रस्ताव तभी पास माना जाएगा जब सदन के कुल सदस्यों के बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से पारित हो।
- दोनों सदनों से पास होना अनिवार्य
- महाभियोग का प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) से अलग-अलग दो-तिहाई बहुमत से पास होना चाहिए।
राष्ट्रपति की मंजूरी
- जब दोनों सदन प्रस्ताव पास कर देते हैं, तब इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है।
- राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ही CEC को पद से हटाया जा सकता है।
क्यों मुश्किल है महाभियोग?
विपक्षी दल प्रस्ताव ला सकते हैं, लेकिन दोनों सदनों में 2/3 बहुमत जुटाना बेहद कठिन है। सरकार के पास अगर मजबूत बहुमत है, तो विपक्ष अकेले महाभियोग पारित नहीं कर सकता।
इसका मतलब यह है कि बिना पर्याप्त संख्या बल के, किसी भी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना लगभग असंभव है। यही वजह है कि अभी विपक्ष के लिए महाभियोग लाना तो आसान है, लेकिन सफल करना बहुत कठिन है।












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