चुनाव आयोग के कंधे पर बंदूक रखकर पर राजनीति क्यों? मुख्य चुनाव आयुक्त ने पॉलिटिकल पार्टियों से पूछा सवाल
Election Commission On SIR: बिहार की सियासत में इन दिनों मतदाता सूची (Voter List) को लेकर घमासान तेज है। विपक्ष जहां सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगा रहा है, वहीं अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इस पूरे विवाद पर सफाई दी है।
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि, 'जब चुनाव आयोग के कंधे पर बंदूक रखकर भारत के मतदाताओं को निशाना बनाकर राजनीति की जा रही है, तो आज चुनाव आयोग सबको साफ संदेश देना चाहता है कि चुनाव आयोग बेखौफ होकर सभी मतदाताओं चाहे गरीब हों या अमीर, बुजुर्ग हों या युवा, महिला हों या किसी भी धर्म या समाज से के साथ चट्टान की तरह खड़ा था, खड़ा है और आगे भी खड़ा रहेगा।'

बुनियाद आरोप लगाना उचित नहीं- CEC
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, 'यह कानून में स्पष्ट प्रावधान है कि रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा परिणाम घोषित करने के बाद 45 दिनों की अवधि के भीतर कोई भी राजनीतिक दल सुप्रीम कोर्ट जाकर इलेक्शन पिटीशन दाखिल कर चुनाव को चुनौती दे सकता है। लेकिन इस 45 दिन की अवधि के बाद, चाहे वह केरल हो, कर्नाटक हो या बिहार, इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगाना उचित नहीं है। जब चुनाव के 45 दिन पूरे होने तक किसी उम्मीदवार या राजनीतिक दल को कोई गड़बड़ी नजर नहीं आती और उसके बाद इतने दिनों के बाद ऐसे आरोप लगाए जाते हैं, तो देश की जनता और मतदाता समझ जाते हैं कि इन बेबुनियाद आरोपों के पीछे की मंशा क्या है।'
#WATCH | Delhi: Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar says, "Some voters alleged double voting. When asked for proof, no answer was given. Neither the Election Commission nor any voter is afraid of such false allegations. When politics is being done by targeting the voters of… pic.twitter.com/EeFKI9ustg
— ANI (@ANI) August 17, 2025
राजनीतिक दलों ने त्रुटियों को सुधारने की मांग की
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि पिछले दो दशकों से लगभग सभी राजनीतिक दल मतदाता सूची में त्रुटियों को सुधारने की मांग कर रहे हैं। इसी के तहत बिहार से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की शुरुआत की गई है। इस प्रक्रिया में सभी मतदाताओं, बूथ स्तर के अधिकारियों और राजनीतिक दलों द्वारा नामित करीब 1.6 लाख BLA मिलकर एक मसौदा सूची तैयार कर चुके हैं।
यह भारत के संविधान का अपमान नहीं तो और क्या है?
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, 'कानून के अनुसार अगर समय रहते मतदाता सूचियों में त्रुटियां साझा न की जाए, अगर मतदाता द्वारा अपने उम्मीदवार को चुनने के 45 दिनों के भीतर उच्च न्यायालय में चुनाव याचिका दायर नहीं की जाए, और फिर वोट चोरी जैसे गलत शब्दों का इस्तेमाल करके जनता को गुमराह करने का असफल प्रयास किया जाए, तो यह भारत के संविधान का अपमान नहीं तो और क्या है?












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