'सीजफायर हमारा फैसला था, किसी और का नहीं', भारत ने संसद में ट्रंप की 'शांति स्थापना' की कहानी को नकारा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत-पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित और सीजफायर करने का श्रेय खुद को देने के दावों पर भारत सरकार ने संसद में स्पष्ट और सख्त जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच 10 मई को हुआ सीजफायर समझौता पूरी तरह द्विपक्षीय था और इसमें अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी।
यह स्पष्टीकरण संसद में उस समय आया जब कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, तृणमूल सांसद माला रॉय सहित अन्य सांसदों ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए। भारत सरकार ने संसद में साफ-साफ कहा है कि पाकिस्तान से सैन्य वार्ता के बाद सीजफायर समझौता हुआ था और इसमें किसी भी तरह से अमेरिका की ट्रंप सरकार का कोई दखल नहीं था।

भारत का जवाब: 'हमने अपने सैन्य उद्देश्य पूरे किए, तभी सीजफायर किया'
विदेश मंत्रालय ने एक विस्तृत टाइमलाइन के साथ बताया कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने "ऑपरेशन सिंदूर" के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया।
MEA ने बताया कि 8 मई तक भारत ने अपने सैन्य उद्देश्य हासिल कर लिए थे और उसके बाद ही पाकिस्तान की पहल पर सैन्य-स्तरीय वार्ता शुरू हुई। 10 मई को भारत ने सीजफायर की घोषणा की, लेकिन वह पूरी तरह से भारत और पाकिस्तान के बीच की बातचीत का नतीजा था।
ट्रंप के दावों को बताया 'बेसलेस'
विदेश राज्य मंत्री कृति वर्धन सिंह ने संसद में दो टूक कहा,"अमेरिका का कोई हस्तक्षेप नहीं था। राष्ट्रपति ट्रंप के यह कहने कि भारत ने अमेरिकी व्यापार समझौते के दबाव में कदम पीछे खींचा, पूरी तरह बेबुनियाद है।"
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत ने अमेरिका को समय रहते सूचित कर दिया था कि अगर पाकिस्तान किसी बड़े हमले की कोशिश करता है, तो भारत कड़ा और निर्णायक जवाब देगा।
भारत की नीति: "कश्मीर पर तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं"
भारत ने दोहराया कि कश्मीर और भारत-पाक संबंध पूरी तरह द्विपक्षीय विषय हैं। किसी भी तीसरे पक्ष, चाहे वह अमेरिका ही क्यों न हो, की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की जा सकती। यह संदेश अमेरिका को स्पष्ट रूप से दिया गया है।
ट्रंप के दावों से देश में उठा सियासी तूफान
राष्ट्रपति ट्रंप ने हालिया अमेरिका में कई सार्वजनिक कार्यक्रमों और चुनावी भाषणों में यह दावा किया था कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध को रोका और शांति स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। उनके इन दावों के बाद भारत में राजनीतिक तूफान उठ गया। राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए कि क्या भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता खतरे में है?
विदेश मंत्री जयशंकर का कड़ा जवाब
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि भारत अपने सैन्य और कूटनीतिक निर्णय खुद लेता है और किसी बाहरी दबाव या सौदेबाजी का इसमें कोई स्थान नहीं है।
उन्होंने दोहराया कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत जब तक भारत ने आतंकी ढांचे को तहस-नहस नहीं कर दिया, तब तक कोई समझौता नहीं हुआ। सीजफायर भारत की शर्तों पर हुआ, न कि किसी अमेरिकी नेता की पहल पर। भारत ने संसद के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया है कि उसकी रक्षा नीति और कूटनीति आत्मनिर्भर और सशक्त है।












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