CBI for SSR: सीबीआई जांच का आदेश देने वाले सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ऋषिकेश रॉय कौन हैं
नई दिल्ली। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया और बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के केस में सीबीआई जांच को हरी झंडी दे दी है। रिया चक्रवर्ती की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की थी कि सुशांत की मृत्यु की जांच बिहार की बजाय मुंबई में हो। कई वर्षों के इतिहास में पहला मौका था जब सुप्रीम कोर्ट की कोई सिंगल बेंच किसी मामले में सुनवाई कर रही थी और इस बेंच की अगुवाई कर रहे थे जस्टिस ऋषिकेश रॉय। बुधवार को उन्होंने जो आदेश दिया है उसकी हर जगह तारीफ हो रही है। आइए आपको बताते हैं कि कौन हैं जस्टिस रॉय।
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आदेश के अंत में कहा, 'सत्यमेव जयते'
जस्टिस रॉय ने सुशांत केस में सीबीआई जांच का आदेश तो दिया ही साथ ही काफी तल्ख लहजे में रिया चक्रवर्ती की याचिका को ठुकराया। उन्होंने आदेश सुनाया और कहा, 'जब सच सूरज की रोशनी से मिलता है तो न्याय सिर्फ जिंदा लोगों रहने पर ही कायम नहीं रहता है बल्कि जिंदगी के बाद भी उसकी मिसाल दी जाती है। अब जो इस दुनिया से जा चुका है वह भी चैन की नींद सो सकेगा। सत्यमेव जयते।' जस्टिस रॉय असम के रहने वाले हैं और साल 1982 में वह बार काउंसिल ऑफ दिल्ली के साथ जुड़े थे। बाद में वह गुवाहाटी चले गए। एक फरवरी 1960 को जन्में जस्टिस रॉय केरल हाई कोर्ट भी चीफ जस्टिस रह चुके हैं। दिसंबर 2004 में उन्होंने बतौर सीनियर एडवोकेट अपने करियर को आगे बढ़ाया।

साल 2015 में आए सुर्खियों में
अक्टूबर 2006 में उन्हें गुवाहाटी हाई कोर्ट का जज बनाया गया। साल 2018 में वह केरल हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस नियुक्त किए गए। दिसंबर 2015 में जस्टिस रॉय ने अरुणाचल प्रदेश में जब हाई-वोल्टेज राजनीतिक ड्रामा चल रहा था तो उस समय सबसे पहले जस्टिस रॉय सुर्खियों में आए थे। तत्कालीन राज्यपाल जेपी राजखोवा के तय समय से पहले विधानसभा सत्र बुलाने के फैसले को हाई कोर्ट के जस्टिस ऋषिकेश रॉय ने अनुच्छेद 174 और 175 का उल्लंघन बताया। प्रदेश विधानसभा का सत्र 14 जनवरी, 2016 से शुरू होना था, लेकिन राज्यपाल ने गत नौ दिसंबर को 16 दिसंबर से सत्र बुलाने की अधिसूचना जारी की थी। राज्यपाल के इसी फैसले को बाद में कोर्ट में चुनौती दी गई थी। रॉय ने उस फैसले पर स्टे लगा दिया था।

साल 2018 का एतिहासिक फैसला
साल 2018 में जब वह केरल हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस नियुक्त हुए तो उस बेंच का हिस्सा बने जिसने हिंदु संस्था की तरफ से दायर एक याचिका को खारिज कर दिया था। इस याचिका में मुसलमान महिलाओं को मस्जिद में दाखिल होने और नमाज अता करने की मंजूरी देने की मांग की गई थी। याचिका खारिज करते हुए जस्टिस रॉय ने कहा कि अगर मुसलमान महिलाओं को फैसले से आपत्ति है तो फिर वह कोर्ट के पास आ सकती हैं। बेंच की तरफ से दिसंबर 2018 में बीजेपी की राजरू महासचिव शोभा सुरेंद्रन पर 25,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था। यह जुर्माना सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के विरोध में प्रदर्शनों को उकसाने के एवज में लगाया गया था।

सुशांत को बताया प्रतिभाशाली एक्टर
सुप्रीम कोर्ट आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को भी मानने से जस्टिस रॉय ने इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट की बेंच की तरफ से कहा गया है कि जो एफआईआर पटना में रजिस्टर हुई है, वह मुंबई पुलिस के न्यायक्षेत्र में भी आती है। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से दो टूक कहा गया है कि आदेश 35 पेज का है और जो कुछ कहना था, वह सब इसमें दर्ज है। अब यह जांच सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हो रही है। जस्टिस रॉय ने अपने फैसले में कहा कि सुशांत सिंह राजपूत एक प्रतिभावान एक्टर थे और उनकी क्षमता का भरपूर प्रयोग होने से पहले ही उनका निधन हो गया।












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