जमीन के बदले नौकरी मामले में बढ़ी लालू प्रसाद यादव की मुश्किल, CBI का बड़ा कदम, पढ़िए पूरी टाइमलाइन

बिहार के पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के खिलाफ जमीन के बदले नौकरी मामले में मुकदमा चलाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, जिसके लिए गृह मंत्रालय ने आवश्यक मंजूरी दे दी है। लैंड फॉर जॉब केस में सीबीआई का यह अहम कदम माना जा रहा है, जोकि लालू की मुश्किल को बढ़ा सकता है।

इस मामले के संबंध में तीस से अधिक व्यक्ति आरोपी हैं, जिनके लिए सीबीआई को अभी तक अभियोजन स्वीकृति नहीं मिली है। ऐसे में इस मामले में ध्यान देने के लिए सीबीआई ने इन आरोपी पक्षों के खिलाफ आवश्यक मंजूरी प्राप्त करने के लिए 15 दिनों का विस्तार मांगा है। सीबीआई इस मामले में शामिल सभी आरोपियों को सजा दिलाने की ओर आगे बढ़ रही है।

lalu prasad yadav

इस मामले से जुड़ी कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ने वाली है, इसकी अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह इस मामले में आरोपियों के खिलाफ आवश्यक मंजूरी प्राप्त करने की प्रक्रिया को तेज करने को कहा है।

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, उनके परिवार और सहयोगियों से जुड़े कथित ज़मीन-के-लिए-नौकरी घोटाले की जांच तेज हो गई है, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मामले को सक्रियता से आगे बढ़ा रहे हैं।

2021 में मामले की जांच

वर्ष 2021 में इस पूरे मामले की जांच शुरू हुई थी। लालू प्रसाद यादव के खिलाफ़ कथित तौर पर नौकरी के इच्छुक लोगों या उनके परिवारों से ज़मीन के बदले में रेलवे में नौकरी देने या फिर बहुत कम दरों पर या उपहार के तौर पर नौकरी देने का आरोप है।

जिसकी सीबीआई जांच कर रही है। इस मामले में लालू प्रसाद यादव से न सिर्फ़ पूछताछ की गई है, बल्कि उनके परिवार से जुड़ी संपत्तियों पर छापे भी मारे गए हैं।

2004-2009 के बीच का मामला

चारा घोटाले में जमानत पर रिहा होने के बाद, लालू प्रसाद यादव को 2004 से 2009 तक केंद्रीय रेल मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल से जुड़े आरोपों का सामना करना पड़ा। यह दावा किया जाता है कि उन्होंने रेलवे क्षेत्र में नौकरियों के बदले में अपने रिश्तेदारों को ज़मीन हस्तांतरित करने की व्यवस्था करके वित्तीय लाभ प्राप्त किया।

सीबीआई के अनुसार, इन रोज़गार के अवसरों को मानक विज्ञापन प्रक्रियाओं को दरकिनार करते हुए जल्दबाजी में भरा गया था, जिसमें पटना में संपत्तियां यादव के परिवार और उनकी नियंत्रित कंपनी को हस्तांतरित की गई थीं।

1450 लोगों को मिली नौकरी

उल्लेखनीय बात यह है कि जांच के दौरान 1,450 से अधिक नौकरी के आवेदनों का पता चला। इनमें से कई आवेदन सीधे रेल मंत्री या सरकार को भेजे गए थे, न कि किसी विशिष्ट रेलवे जोन को, जिससे केंद्र द्वारा ये भर्तियां की जानी थी। मामले की जांच में यह बात सामने आई है कि इसमे कई शीर्ष अधिकारी प्रत्यक्ष तौर पर शामिल हैं।

लालू के ओएसडी के खिलाफ कार्रवाई

जुलाई में सीबीआई ने लालू प्रसाद के करीबी सहयोगी और उनके पूर्व ओएसडी भोला यादव को हिरासत में ले लिया। उन पर संदिग्ध भूमि सौदों को सुगम बनाने और नौकरी दिलाने में अहम भूमिका निभाने का आरोप है।

इस गिरफ्तारी के बाद पूरे मामले में नया मोड़ आया और कथित तौर पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, उनके परिवार और सहयोगियों से जुड़े कथित ज़मीन-के-लिए-नौकरी घोटाले की जांच तेज हो गई।

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