छोटे कारोबारियों से वसूल किए जाएंगे पुराने टैक्स, IT डिपार्टमेंट सुप्रीम कोर्ट में कर सकता है अपील
इन नोटिफिकेशंस से टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के साथ अपने विवादों को लेकर पिछली तारीख से राहत मिली थी, लेकिन अब उनके मामले दोबारा खुल सकते हैं।
नई दिल्ली। आयकर विभाग छोटे कारोबारियों से पुराने टैक्स की वसूली शुरू करने वाला है। सुप्रीम कोर्ट के हाल के एक फैसले में कहा है कि 'सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) पिछली तारीख से लागू होने वाला कोई सर्कुलर जारी नहीं कर सकता।' 'जिन छोटे टैक्सपेयर्स को पहले टैक्स डिमांड मिली थी, उन पर इस फैसले का असर पड़ सकता है। इस तरह के मामले जिन्हें ट्राइब्यूनल ने खारिज कर दिया था, उन मामलों को अब ट्राइब्यूनल के पास भेजा जा सकता है। इससे कानूनी मामले बढ़ेंगे और असेसीज को कानूनी खर्च के लिए जेब ढीली करनी होगी।'

इन नोटिफिकेशंस से टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के साथ अपने विवादों को लेकर पिछली तारीख से राहत मिली थी, लेकिन अब उनके मामले दोबारा खुल सकते हैं। चार्टर्ड अकाउंटेंसी फर्म अशोक माहेश्वरी ऐंड असोसिएट्स LLP के पार्टनर, अमित माहेश्वरी ने कहा, 'आशंका है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ऑर्डर को लागू करने के लिए कोर्ट में बड़ी संख्या में अपील दायर कर सकता है।'
नियमों में हुआ था बदलाव
राजस्व विभाग ने आयकर विभाग और छोटे टैक्सपेयर्स के बीच विवाद को कम करने के लिए कुछ साल पहले नियम में बदलाव करके फैसला किया था कि एक खास सीमा से नीचे की टैक्स डिमांड से जुड़ी रकम की वसूली के लिए विभाग कानूनी रास्ता नहीं अपनाएगा।टैक्स डिमांड से जुड़ी वित्तीय सीमा फरवरी 2011 में तय की गई थी और दिसंबर 2015 में इसमें बढ़ोतरी हुई थी। इनसे नीचे की रकम के लिए आयकर विभाग मामले की स्थिति और डिमांड की मात्रा के आधार पर टैक्स ट्राइब्यूनल, हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट नहीं जाएगा।
CBDT ने 2011 में जारी किया था नोटिफिकेशन
'2011 में CBDT ने एक नोटिफिकेशन में कहा था कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट टैक्स डिमांड के 4 लाख रुपये या कम होने पर इनकम टैक्स ट्राइब्यूनल में अपील दाखिल नहीं करेगा। इसके साथ ही CBDT ने कहा था कि रकम के 10 लाख रुपये या कम होने पर हाई कोर्ट और 25 लाख रुपये या कम होने पर सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल नहीं की जाएगी। इसके बाद 10 दिसंबर, 2015 को ट्राइब्यूनल और हाई कोर्ट जाने के लिए वित्तीय सीमा बढ़ाकर क्रमश: 10 लाख और 20 लाख रुपये कर दी गई। सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए 25 लाख रुपये की सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया।












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