ओमिक्रॉन कितना घातक फिलहाल नहीं कह सकते, लेकिन भारत को तीसरी लहर के लिए तैयार रहना चाहिए- विशेषज्ञ
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), बीबीनगर के कार्यकारी निदेशक डॉ विकास भाटिया ने शनिवार को कहा कि ओमाइक्रोन वेरिएंट जानलेवा नहीं है, लेकिन भारत को तीसरी लहर को लेकर तैयार रहना चाहिए।
नई दिल्ली, 4 दिसंबर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), बीबीनगर के कार्यकारी निदेशक डॉ विकास भाटिया ने शनिवार को कहा कि ओमाइक्रोन वेरिएंट जानलेवा नहीं है, लेकिन जिस तरह से इसके केस सामने आ रहे हैं, उसे देखते हुए भारत को तीसरी लहर को लेकर तैयार रहना चाहिए। एक मीडिया चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि इस वेरिएंट के सटीक खतरे का पता लगाने के लिए अधिक जानकारी की आवश्यकता है, लेकिन यह अभी तक जानलेवा नहीं लगता है।

भारत को तीसरी लहर को लेकर तैयार रहना चाहिए
कोरोना की तीसरी लहर के बारे में भाटिया ने कहा कि ओमिक्रॉन वेरिएंट के तेजी से फैलने की क्षमता, लेकिन कम घातकता को ध्यान में रखते हुए भारत को कोरोना की संभावित तीसरी लहर से लड़ने के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि यह वेरिएंट तीसरी लहर का कारण हो सकता है। उन्होंने आगे कहा कि फिलहाल हम यह भविष्यवाणी नहीं कर सकते कि यह वायरस जानलेवा है कि नहीं, लेकिन अभी तक 30 से अधिक देशों में इसके मामले सामने आए हैं, लेकिन दुनिया के किसी भी हिस्से से किसी की मौत की सूचना नहीं मिली है। हम अभी और जानकारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं, अगर यह सामने आता है कि ओमिक्रॉन जानलेवा नहीं है तो यह हमारे लिए अच्छी खबर हो सकती है, लेकिन भारत को कोरोना की तीसरी लहर को लेकर तैयार रहना चाहिए।
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हाइब्रिड इम्युनिटी भारत के लिए मददगार
उन्होंने आगे कहा कि ज्यादातर मामलों में ओमिक्रॉन के लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन फिर भी हमें सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि इसकी संचरण दर काफी अधिक है। उन्होंने कहा कि यदि ओमिकॉन जानलेवा साबित होता है तो ऐसे में टीकाकरण एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। इसके अलावा हाइब्रिड इम्युनिटी भी ओमिक्रॉन से लड़ने में भारत की मदद करेगी। बता दें कि विभिन्न सर्वे के अनुसार भारत के 70-80 प्रतिशत लोग कोरोना से लड़कर ठीक हो चुके हैं, यानि वह कोरोना के प्रति एंटीबॉडी प्राप्त कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तथ्यों से यह साबित हो चुका है कि कोरोना के प्रति एंटीबॉडी प्राप्त कर चुके व्यक्ति इससे आसानी से लड़ सकते हैं।
भारत में सामने आए अभी तक तीन मामले
बता दें कि भारत में अब तक ओमिक्रॉन के 3 केसों की पुष्टि हो चुकी है, जिसमें से दो कर्नाटक और एक गुजरात से सामने आया है।
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