मोदी कैबिनेट विस्तार को लेकर हलचल तेज, दूसरे दलों के 'बागी', अपने 'रूठें' बनेंगे मंत्री
नरेंद्र मोदी कैबिनेट विस्तार को लेकर हलचल तेज, दूसरे दलों के 'बागी', अपने 'रूठों' को मिल सकता है मंत्रीपदमोदी कैबिनेट विस्तार को लेकर हलचल तेज, दूसरे दलों के 'बागी' और अपने 'रूठें' बनेंगे मंत्री
नई दिल्ली, 18 जून: केंद्रीय कैबिनेट का जल्दी ही विस्तार किया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हफ्ते भारतीय जनता पार्टी के सीनियर नेताओं और मंत्रियों के दो अलग-अलग समूहों के साथ दो बैठकें की हैं। सूत्रों का कहना है कैबिनेट विस्तार को लेकर ये बैठक हुई हैं और इसी महीने केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल किया जाएगा। ऐसा माना जा रहा है कि मौजूदा मंत्रियों में तो किसी को नहीं हटाया जाएगा लेकिन कई नए नाम जरूर कैबिनेट में शामिल किए जाएंगे।

दो मंत्रियों की मौत, दो सहयोगी दल छोड़ चुके एनडीए
नरेंद्र मोदी सरकार का दूसरा कार्यकाल 30 मई 2019 को शुरू हुआ था। इसके बाद से कैबिनेट में बदलाव नहीं किया गया है, ये कैबिनेट में पहला फेरबदल होगा। 2019 में मंत्री बने दो नेताओं की मृत्यु हो चुकी है। लोजपा के रामविलास पासवान कैबिनेट मंत्री थे तो भाजपा के सुरेश अंगड़ी राज्य मंत्री थे। वहीं शिरोमणि अकाली दल और शिवसेना 2019 में भाजपा के साथ थीं, दोनों दलों के पास एक-एक मंत्री पद था। दोनों पार्टियां अब एनडीए छोड़ चुकी हैं।

कई मंत्रियों के पास है अतिरिक्त जिम्मेदारी
पीयूष गोयल और नेरंद्र सिंह तोमर जैसे कई मंत्री हैं, जिनके पास कई-कई विभाग हैं। ऐसे में इन मंत्रियों से अतिरिक्त भार लेकर नए मंत्रियों को सौंपा जा सकता है। इस सबके बीच ये देखना दिलचस्प होगा कि किन नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। कई नाम इस समय चल रहे हैं। जिनमें से ज्यादातर ऐसे हैं जो या तो दूसरे दलों से आए हैं या फिर पार्टी से खफा बताए जा रहे हैं।
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इन नेताओं को बनाया जा सकता है मंत्री
असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल का नाम भी मंत्री बनने के लिए चर्चा में हैं। असम में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में जीत के बाद उनकी जगह हेमंत सरमा को सीएम बनाया गया है। ऐसे में उनको केंद्र में बुलाया जा सकता है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम भी लगातार मंत्रीपद के लिए आगे हैं। यूपीए सरकार में मंत्री रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कई विधायकों को तोड़ते हुए मार्च 2020 में कांग्रेस छोड़ी थी। जिसके बाद मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार गिर गई थी और भाजपा की सरकार बनी थी।
दिनेश त्रिवेदी ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा ज्वाइन की है। त्रिवेदी केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। त्रिवेदी ने फरवरी में राज्यसभा और तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। पश्चिम बंगाल से आने वाले त्रिवेदी को मंत्रिमंडल में शामिल करने की चर्चाएं तेज हैं।
ओडिशा-कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी अश्विनी बैष्णब जून 2019 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे। उनका नाम भी मंत्रीपद के लिए चल रहा हैं। बीजेपी के काफी पुराने नेता भूपेंद्र यादव को भी कैबिनेट में लिया जा सकता है। यादव राजस्थान से भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद हैं।

वरुण और अनुप्रिया पटेल का नाम भी चर्चा में
उत्तर प्रदेश से भाजपा सांसद वरुण गांधी का नाम भी मंत्री बनाए जाने वाले नेताओं की लिस्ट में बताया गया है। नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में मेनका गांधी मंत्री थीं। इस बार उनको मंत्री नहीं बनाया गया है। ऐसे में वरुण के पार्टी से खफा होने की भी खबरें आई हैं। ऐसे में उनको मंत्रिमंडल में लिया जा सकता है।
अपना दल (एस) की नेता, यूपी के मिर्जापुर से सांसद अनुप्रिया पटेल को मंत्री पद से नवाजे जाने की अटकलें भी तेज हैं। अनुप्रिया पटेल की कुछ समय पहले गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात भी हुई है।
लद्दाख से भारतीय जनता पार्टी के सांसद जम्यांग त्सेरिंग नामग्याल आर्टिकल 370 हटाए जाने के समय अपने भाषणों से चर्चा में आए थे। उनको जुलाई 2020 में भाजपा की स्थानीय इकाई का प्रमुख नियुक्त किया गया था। अब माना जा रहा है कि उनको कैबिनेट में भी जगह मिल सकती है।












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