'करीब 70 पुलिसवाले आए और मेरे घर में तोड़फोड़ की, मेरी बहू को भी पीटा'

'मैं घर पर नहीं थी, करीब 70 की संख्या में पुलिसकर्मी आए और मेरे घर में तोड़फोड़ की, यहां तक कि उन्होंने मेरी पुत्रवधू को भी पीटा।'

नई दिल्ली। यूपी के बुलंदशहर में सोमवार को सड़कों पर भीड़ ने जमकर तांडव मचाया। गोकशी की सूचना पर इकट्ठा हुई भीड़ ने वाहनों में आग लगा दी, पुलिसकर्मियों पर पथराव किया और इस बवाल में यूपी पुलिस के एक अफसर इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की जान चली गई। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए अभी तक 27 नामजद लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जिनमें से चार को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि मुख्य आरोपी योगेश राज को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। पुलिस ने करीब 50-60 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया है। वहीं, इस मामले में एक आरोपी जितेंद्र नामक शख्स की मां ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

'उन्होंने मेरी पुत्रवधू को भी पीटा'

'उन्होंने मेरी पुत्रवधू को भी पीटा'

सोमवार को बुलंदशहर में हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने जिन 27 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की है, उनमें से एक आरोपी का नाम जितेंद्र है। जितेंद्र की मां रतन ने मीडिया से बात करते हुए बताया, 'मैं घर पर नहीं थी लेकिन गांववालों ने मुझे बताया कि करीब 70 की संख्या में पुलिसकर्मी आए, जिनके साथ कोई महिला पुलिसकर्मी नहीं थी। उन लोगों ने आकर मेरे घर में तोड़फोड़ की, यहां तक कि उन्होंने मेरी पुत्रवधू को भी पीटा।'

चमन, देवेंद्र, आशीष चौहान और सतीश गिरफ्तार

चमन, देवेंद्र, आशीष चौहान और सतीश गिरफ्तार

वहीं, इस मामले में एडीजी लॉ एंड ऑर्डर आनंद कुमार ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि जिन लोगों ने हिंसा की, उनके बारे में अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि वो किस संगठन के लोग थे। पुलिस ने अभी तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनके नाम- चमन, देवेंद्र, आशीष चौहान और सतीश हैं। हिंसा के मामले में मुख्य आरोपी योगेश राज की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हो सकी है। पुलिस ने इस मामले में 6 टीमों का गठन किया है। फिलहाल हालात काबू में हैं। पुलिस ने बताया कि सोमवार को हुई हिंसा में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह और सुमित नामक युवक की मौत हुई है। सुमित को गोली कैसे लगी, इसकी जांच की जा रही है। एडीजी ने कहा कि बिना जांच के यह नहीं कहा जा सकता कि यह इंटेलिजेंस या किसी अन्य एजेंसी की विफलता है।

'साहेब को बचाना चाहता था लेकिन...'

'साहेब को बचाना चाहता था लेकिन...'

घटना के बारे में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार के ड्राइवर रामाश्रय ने बताया कि वह अपने साहेब को बचाना चाहता था, लेकिन भीड़ इतनी उग्र थी कि उसकी खुद की जान को ही खतरा था। रामाश्रय ने बताया कि साहेब दीवार के पास बेहोश पड़े हुए थे, मैंने उन्हें उठाया और पुलिस जीप के भीतर लिटाया, लेकिन जैसे ही मैंने जीप चलानी शुरू की तो कुछ लोगों ने हमारे ऊपर पत्थरबाजी और गोली चलानी शुरू कर दी। जिस तरह से लोग पत्थर फेंक रहे थे और गोली चला रहे थे, मुझे वहां से अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा। स्थानीय मीडिया से बात करते हुए रामाश्रय ने बताया कि मैंने अपने साहेब को बचाने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन मेरी ही जान पर बन पड़ी थी।

बुलंदशहर में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात

बुलंदशहर में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात

वहीं, इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनकी मौत गोली लगने से बताई गई है। मौके पर मौजूद पुलिस इंस्पेक्टर सुरेश कुमार ने घटना के बार में बताया कि उग्र भीड़ ने सड़क जाम कर दी थी और वो लोग पुलिस टीम पर पत्थरबाजी कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों की संख्या 300 से 500 के बीच बताई जा रही है। इस हमले में इंस्पेक्टर सुरेश कुमार को भी चोट आई है। पुलिस ने इस मामले में दो एफआईआर दर्ज की हैं, पहली- अवैध गोकशी को लेकर और दूसरी भीड़ के हिंसक प्रदर्शन को लेकर। एहतियात के तौर पर बुलंदशहर में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस का कहना है कि दोषी लोगों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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