'ना नागालैंड में नागरिकों की हत्या पर अफसोस, ना कोविड से मौतों के लिए माफी'- अभिभाषण पर बोले मनीष तिवारी
राष्ट्रपित के अभिभाषण में कोविड से मौतों पर बात क्यों नहीं: मनीष तिवारी
नई दिल्ली, 31 जनवरी: संसद का बजट सत्र आज, 31 जनवरी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण के साथ शुरू हो गया है। संसद के दोनों को सदनों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कई बातें कहीं। जिस पर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि कई गंभीर मुद्दे इस अभिभाषण में नहीं थे, जिन पर सरकार को बात करनी चाहिए थी। जिसमें नागालैंड में आम लोगों की हत्या और कोरोना में मौत जैसी बातें अहम हैं।

पंजाब की आनंदपुर लोकसभा से सांसद, सीनियर कांग्रेस लीडर मनीष तिवारी ने बजट सत्र से पहले राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के अभिभाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, राष्ट्रपति ने नागालैंड में नागरिकों के नरसंहार पर कोई बात नहीं की। कोविड -19 की दूसरी लहर के दौरान हुई मौतों और अव्यवस्था बारे में भी उनके संबोधन में कुछ नहीं था। इस पर सरकार की ओर से माफी मांगी जानी चाहिए थी। तिवारी ने आगे कहा, राष्ट्रपति के अभिभाषण में जम्मू और कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल करने के बारे में बात किए जाने की उम्मीद थी लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा। तालिबान के अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज होने और भारत पर इसके प्रभाव का उल्लेख उनके संबोधन में नहीं किया गया।
क्या कहा है राष्ट्रपति ने
संसद के दोनों सदनों की सयुंक्त बैठक में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि छोटे किसानों और महिला सशक्तिकरण पर सरकार का खास ध्यान है। सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था और देश के किसानों को सशक्त बनाने के लिए निरंतर काम कर रही है। महिला सशक्तिकरण सरकार की उच्च प्राथमिकताओं में से एक है। बेटे-बेटी को समानता का दर्जा देते हुए सरकार ने महिलाओं के विवाह के लिए न्यूनतम आयु को 18 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष करने का विधेयक भी संसद में प्रस्तुत किया है। सरकार ने तीन तलाक को कानूनन अपराध घोषित कर समाज को कुप्रथा से मुक्त करने की शुरुआत की है।












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