Budget 2023: आयकर के 5 ऐसे नियम, जिनमें बदलाव की उम्मीद है

इस साल के बजट से आयकर दाताओं ने काफी उम्मीदें लगा रखी हैं। आयकर में बेसिक छूट की सीमा से लेकर सेक्शन 80सी तक में बढ़ोतरी की उम्मीदें की जा रही है।

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Budget 2023 Tax slab: 1 फरवरी, 2023 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का अंतिम पूर्ण बजट पेश करेंगी। अगले साल के बजट में लोकसभा चुनावों की वजह से सरकार को सिर्फ आंशिक बजट ही पेश करने का मौका मिलेगा। ऐसे में आयकर दाताओं को इस बार चुनावी बजट होने की वजह से केंद्र सरकार से काफी उम्मीदें हैं। वह निजी आयकर में कई तरह की राहत की उम्मीदें कर रहे हैं। टैक्स एक्सपर्ट को भी उम्मीद है कि सरकार आयकर दाताओं के लिए कुछ बड़ी घोषणाएं कर सकती है। आइए जानते हैं कि सरकार से आयकर दाताओं को पांच बड़ी उम्मीदें क्या हैं।

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    1) सेक्शन 80सी में बदलाव

    1) सेक्शन 80सी में बदलाव

    आयकर कानून के तहत आयकर दाता टैक्स में बचत के लिए सबसे ज्यादा इसी नियम का लाभ उठाते हैं। सेक्शन 80सी के तहत पीपीएफ/ईपीएफ, जीवन बीमा, एनएससी,एएसवाई,ट्यूशन फीस, होम लोन प्रिंसिपल आदि चीजें आती हैं। 2014 से इसमें छूट की अधिकतम सीमा 1.5 लाख रुपए है। जबकि, इस नियम का दायरा बहुत विशाल है। उम्मीद है कि सरकार अब इसे बढ़ाकर 2 लाख रुपए या 2.5 लाख रुपए तक कर सकती है। कुछ जानकारों का तो सुझाव है कि मध्यम वर्गों की मुश्किलों को देखते हुए इसे सालाना 3 लाख रुपए कर दिया जाना चाहिए। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक टैक्सटूविन के सीईओ और को-फाउंडर अभिषेक सोनी का कहना है कि सेक्शन 80सी के तहत कम से कम छूट का दायरा 2.5 लाख करने से लोग ज्यादा टैक्स-बचाने वाले विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। इससे मुद्रास्फीति से भी राहत मिलेगी।

    2) आयकर में बेसिक छूट की सीमा में बदलाव

    2) आयकर में बेसिक छूट की सीमा में बदलाव

    कई टैक्स एक्सपर्ट का सुझाव है कि सरकार को इनकम टैक्स ऐक्ट के तहत आयकर में बेसिक छूट की सीमा को बढ़ाकर सबके लिए 5 लाख रुपए कर देनी चाहिए। मौजूदा समय में 2.5 लाख रुपए तक आय पर ही बेसिक छूट लागू है। मतलब जिन लोगों की आय 2.5 लाख रुपए तक है, उन्हें कोई आयकर नहीं देना होता। इसी सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपए करने की मांग हो रही है। बेसिक आयकर की इस सीमा में वित्त वर्ष 2014-15 के बाद से कोई बदलाव नहीं हुआ है। अपस्टॉक्स के डायरेक्टर पुनीत माहेश्वरी ने कहा है, 'लोगों के हाथों में ज्यादा पैसा देने के लिए, सरकार को लाभांश भुगतान पर टैक्स खत्म करने, निवेशकों के लिए टैक्स ब्रैकेट को कम करने और बेसिक टैक्स की छूट के स्तर को 2.5 लाख से बढ़ाकर 5 लाख या उससे अधिक करने पर भी विचार करना चाहिए।' वहीं सोनी का कहना है कि आयकर पर बेसिक छूट की सीमा बढ़ाने से लोगों के पास ज्यादा पैसे होंगे, उनकी निवेश की क्षमता बढ़ेगी और इससे आर्थिक विकास में भी मदद मिलेगी।

    3)सेक्शन 80डी की सीमा बढ़ाने पर विचार

    3)सेक्शन 80डी की सीमा बढ़ाने पर विचार

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक महामारी की शुरुआत के बाद से स्वास्थ्य सेवाएं और महंगी हो गई हैं। इसलिए कई एक्सपर्ट का मानना है कि सरकार को स्वास्थ्य बीमा के लिए प्रीमियम भुगतान की सीमा को और बढ़ाने के लिए सेक्शन 80डी के तहत ज्यादाछूट देनी चाहिए। मौजूदा समय में इस नियम के तहत सिर्फ 25,000 रुपए तक की राहत मिलती है। इसमें छूट लेने से लोगों को स्वास्थ्य बीमा के लिए ऐसी पॉलिसी लेने में मदद मिलेगी, जिसमें महंगा से महंगा इलाज स्वास्थ्य बीमा की रकम से संभव हो सके।

    4) होम लोन में छूट में भी बढ़ोतरी की उम्मीद

    4) होम लोन में छूट में भी बढ़ोतरी की उम्मीद

    कई एक्सपर्ट उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले बजट में वित्त मंत्री होम लोन लेने वाले आयकर दाताओं को इंटरेस्ट में मिलने वाली राहत में और छूट की घोषणा करेगी। अभी होम लोन पर अधिकतम ब्याज भुगतान पर छूट 2 लाख रुपए तक निर्धारित है। जबकि, पूरे देश में प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ी हैं और 6%-7% के हिसाब से मुद्रास्फीति भी बढ़ रही है। सोनी का कहना है कि होम लोन ब्याज पर छूट की सीमा कम से कम 3 लाख रुपए होनी चाहिए, चाहे प्रॉपर्टी की कीमत कुछ भी हो।

    5) लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स में राहत

    5) लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स में राहत

    उद्योग जगत से जुड़े कुछ एक्सपर्ट का सुझाव है कि सरकार को रिटेल म्यूचूअल फंड और स्टॉक इंवेस्टर को भी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स में राहत देने पर विचार करना चाहिए। जैसे कि माहेश्वरी का कहना है कि इक्विटी पर इसे हटाना फायदेमंद रहेगा। इस समय एक वित्तीय वर्ष में 1 लाख रुपये से अधिक कैपिटल गेन होने पर 10% टैक्स लगता है।

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