आम बजट 2015 से शहरों को क्या मिलने की उम्मीद?
नई दिल्ली। देश के वित्तमंत्री अरुण जेटली संसद में बजट पेश करने जा रहे हैं। इस बजट से हर किसी को बड़ी उम्मीदें हैं और हर कोई अच्छे दिनों की उम्मीद कर रहा है। लेकिन अगर शहरों की बात करें तो शहरवासियों को क्या उम्मीदें करनी चाहिये यह हम आपको बताने जा रहे हैं।
सबसे पहले कुछ आंकड़े-
- 2030 तक देश की शहरी जनसंख्या 59 करोड़ हो जायेगी।
- देश की अर्थव्यवस्था में 70 फीसदी योगदान शहरवासियों का होता है।
- हर साल नई नौकरियां सबसे ज्यादा शहरों में ही सृजित होती हैं।
- अगले 20 सालों में अच्छी सुविधाएं प्रदान करने के लिये शहरों को 39 लाख करोड़ रुपए की जरूरत पड़ेगी।
- पिछले बजट में सरकार ने शहरी विकास के लिये 17,459 करोड़ रुपए दिये।
- पिछले बजट में सरकार ने आवासीय योजनाओं के लिये 6,008 करोड़ रुपए दिये।
- 100 स्मार्ट सिटीज़ के लिये 7,040 करोड़ रुपए आवंटित किये गये थे।
- 2,420 करोड़ रुपए लखनऊ और अहमदाबाद मेट्रो रेल के लिये दिये गये।
शहरों को क्या उम्मीदें हैं बजट से
- जवाहर लाल नेहरू अर्बन रिन्युवल मिशन (जेएनएनयूआरएम) में बड़ी राशि आवंटित करने की जरूरत है।
- जेएनएनयूआरएम से देश के 65 शहरों की कायापलट हो सकती है।
- स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में ज्यादा से ज्यादा धनराशि दी जाये, ताकि जल्द से जल्द थ्री-टियर सिटीज़ टू-टियर में बदल सकें।
- स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में ज्यादा खर्च करने से इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा तो रोजगार बढ़ेगा।
- एक शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिये हर साल 50 करोड़ रुपए की आवश्यकता होगी।
- शहरी विकास के लिये धन बढ़ाने की आवश्यकता है, क्योंकि यहीं से 70 फसदी अर्थव्यवस्था तय होती है।
- शहरों में विदेशी कंपनियों के निवेश बढ़ाने के लिये नई योजना लाने की जरूरत देश के लगभग सभी शहर महसूस कर रहे हैं।
नोट- इस लेख में आंकड़ें इंडिया स्पेंड डॉट ओआरजी के सौजन्य से हैं।













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