पानी पी-पीकर सपा, कांग्रेस और केजरीवाल को मायावती ने कोसा

भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए मायावती ने कहा कि मुझे परेशान करने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली केंद्र की एनडीए सरकार ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में गलत तरीके से फंसाया। परेशान करने के लिए मेरे पीछे सीबीआई लगा दी गई पर मैं नहीं डरी। मैं एक स्वाभिमानी लड़की हूं, और मैंने तय कर लिया था कि चाहे जेल ही क्यों न जाना पड़े, कभी भी इन सांप्रदायिक शक्तियों से हाथ नहीं मिलाऊंगी। मायावती ने मोदी पर भी निशाना साधा और कहा कि मोदी झूठे लोकलुभावने वादे कर रहे हैं। मोदी गुजरात के पैटर्न पर देश का विकास करने का वादा करते हैं, जबकि गुजरात में हर तीसरा बच्चा कुपोषित है।
सपा सरकार पर हमला बोलते हुए मायावती ने कहा कि यूपी अब क्राइम प्रदेश बन चुका है। हर लेवल पर भ्रष्टाचार फैला हुआ है। आए दिन सांप्रादायिक दंगों से प्रदेश त्रस्त है। दंगों से मुजफ्फरनगर और शामली के लोग अभी उबरे नहीं है। यहां केंद्र सरकार को राष्ट्रपति शासन लगाना चाहिए। कांग्रेस औऱ सपा के लोगों की अनाप शनाप बयानबाजी से पीड़ितो के जख्मों पर नमक छिड़का गया। इन सरकार के अधिकारियों पर सपा के गुंडे हावी है। इन पर सपा का कोई जोर नहीं चलता है। केंद्र सरकार को निशाना बनाते हुए माया ने कहा कि विदेश नीति में ढुलमुल रवैये से हमारे लोगों को मुश्किल हो रही है।
गलत आर्थिक नीतियों के चलते कट्टरपंथियों और सांप्रादायिक ताकत मजबूत हो रही हैं। हमारे कार्यकाल में एक भी सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ था। ये हमारी सरकार का सबसे बड़ा काम था। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हमने दंगा नहीं होने दिया। अपराधियों को हमने सलाखों के पीछे भेजा। अगर बीएसपी के एमपी, एमएलए ने गलत काम किया है तो हमने उसे भी जेल भेजा है। अंत में केजरीवाल पर हमला बोलते हुए मायावती ने कहा कि आम आदती पार्टी नाटकबाजी कर रही है।
दिखावा करके ज्यादा दिन काम नहीं चलेगा। दिल्ली में केजरीवाल जी की जो सरकार चल रही है, उसमें दलितों को आम आदमी की संज्ञा देकर उनकी उपेक्षा कर रहे हैं। केजरीवाल जहां के रहने वाले हैं, वहां के दलितों को मजबूर होकर दूसरे जगह शरण लेनी पड़ती है। चाहे आम आदमी की पार्टी हो, चाहे कोई भी हो, दलित वर्ग के किसी आदमी को अपनी सरकार में शामिल कर राजनैतिक रोटियां तो सेंकी जा सकती है, लेकिन ऐसी सरकार ज्यादा दिन तक नहीं चल सकती। एक दिन का जनता दरबार औऱ फिर मेल के जरिए शिकायत सुनने से निवारण नहीं हो सकता है। सरकारी मशीनरी की व्यवस्था ठीक करनी होगी।












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