सिविल सेवा परीक्षा के लिए अधिकतम उम्र सीमा घटाने का प्रस्ताव
नई दिल्ली। सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों को जोर का झटका लग सकता है, क्योंकि एक विशेषज्ञ पैनल ने सिविल सेवा परीक्षा के लिए अधिकतम उम्र को घटाने का प्रस्ताव दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक दबाव में अधिकतम उम्र को न घटाने विचार छोड़ अब आगे बढ़ना चाहिए।

यूपीएससी की राय लेकर ही सरकार कोई फैसला करेगी
एचटी की खबर के मुताबिक पूर्व शिक्षा सचिव बीएस पासवान की अध्यक्षता में बने एक पैनल ने संघ लोक सेवा आयोग में एक रिपोर्ट जमा की है। इस रिपोर्ट में यूपीएससी परीक्षा को लेकर कई बातें कही गई हैं।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि इस रिपोर्ट को पहले आयोग जांचेगा और उसके बाद यूपीएससी की राय लेकर ही सरकार कोई फैसला करेगी। बीएस पासवान ने इस पर कोई भी कमेंट करने से मना कर दिया।
सिविल सेवा परीक्षा को तीन चरणों में आयोजित किया जाता है। प्री, मेन्स और इंटरव्यू के बाद लाखों लोगों में से सिर्फ 1000 लोग ही इस परीक्षा में सफल हो पाते हैं। यूपीएससी के जरिए आईएएस, आईएफएस, आईपीएस और अन्य भारतीय सेवाओं के लिए लोगों को चुना जाता है।
हर साल करीब 5 लाख लोग सिविल सेवा परीक्षा का फॉर्म भरते हैं और उनमें से कुछ ही लोग सफल हो पाते हैं। इस परीक्षा में पास होने वालों का अंकों का प्रतिशत भी काफी कम होता है। इस साल सिविल सेवा परीक्षा में टॉप करने वाली टीना डाबी भी अधिकतम 49.5% अंक प्राप्त करके अपना मुकाम हासिल किया।

कई सालों से अधिकतम उम्र सीमा को घटाने का प्रस्ताव तैयार!
सिविल सेवा परीक्षा में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को अधिकतम पांच साल, अन्य पिछड़ा वर्ग को तीन साल और शारीरिक रूप से विकलांग लोगों को अधिकतम दस साल की छूट दी जाती है।
इससे पहले भी सिविल सेवा परीक्षा के लिए अधिकतम उम्र को घटाने के प्रयास किए जा चुके हैं। वर्ष 1960 में इसके लिए 26 साल, वर्ष 1980 में 28 और अब 32 साल की आयु तय की गई है।
अधिकतम उम्र घटाने के प्रस्ताव का विरोध संसद तक में हो चुका है। क्योंकि सांसदों का मानना है कि कम विकसित क्षेत्रों में रहने वाले उम्मीदवारों के लिए यह एक कठिन फैसला होगा।
पैनल ने कहा कि पिछले कई सालों से अधिकतम उम्र सीमा को घटाने का प्रस्ताव तैयार किया गया। पर इसके बावजूद आजतक इस लागू नहीं किया जा सका है।












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