'तौकते' के कहर में एक्ट्रेस दिव्या दत्ता को सहना पड़ा ये सब, बोलीं- सबकुछ बिखर रहा था, लेकिन...
मुंबई, मई 20: कोरोना की दूसरी लहर के बीच अचनाक आई एक और विपदा ने देश को हिला कर रख दिया। अरब सागर से उठे चक्रवाती तूफान ने कई राज्यों में जमकर कहर बरपाया। केरल, कर्नाटक, गोवा में तबाही मचाने के बाद तौकते चक्रवात महाराष्ट्र और गुजरात की ओर बढ़ा। इस भयंकर चक्रवाक नेहजारों की संख्या में पेड़, बिजली के पोल और मकानों को धराशाही कर दिया। मुंबई को काफी नुकसान पहुंचा है। इस दौरान लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा, जिनमें से एक बॉलीवुड एक्ट्रेस दिव्या दत्ता भी थी।

'तौकते' पर दिव्या दत्ता ने कही यह बात
17 मई को मुंबई को प्रभावित करने वाले तौकते तूफान की तबाही सोशल मीडिया पर फैली तस्वीरें दे रही है। सड़कों पर टूटकर गिरे पेड़ और उनकी चपेट में आई गाड़ियों की फोटोज और समुद्र में उठती हुई ऊंची-ऊंची लहरों से लोगों में दहशत फैल गई थी। ऐसी स्थिति के बारे में बताते हुए अभिनेत्री दिव्या दत्ता ने कहा कि न बिजली थी, न वाईफाई। हमारा एक-दूसरे से पूरी तरह से संपर्क टूट गया था। ऐसे हालातों में जब हमें वास्तव में एक दूसरे के साथ जुड़े रहने की जरूरत होती है। यहां सब कुछ बिखर हुआ रहा था। दिव्या ने बताया मेरे कुछ दोस्तों ने मुझे गोवा से मैसेज किया और कहा कि उनके घर भी बिजली नहीं है।

'ऐसी सहानुभूति देखना दिल को छू लेने वाला'
पिछले साल भी मुंबई में आए निसर्ग चक्रवात के डर को याद करते हुए एक्ट्रेस ने कहा 'मुझे अपनी खिड़कियां बंद करनी पड़ीं। गनीमत रही कि तभी वह कहीं और से गुजरा। मुझे लगता है कि ऐसा वक्त हम सभी को एक साथ लाता हैं।' दिव्या दत्ता ने कहा कि जब कोई संकट आता है, तो सबसे अच्छा तरीका सिर्फ हाथ थामना है और कोई रास्ता नहीं है। हम पहले से ही एक महामारी से जूझ रहे है, लेकिन यह हमें बहुत कुछ एक साथ भी लाता है। खासतौर से कोविड -19 की दूसरी लहर के आने के बाद लोग एक साथ हो गए हैं। उन्होंने कहा कि चारों ओर लोगों की सहानुभूति देखना दिल को छू लेने वाला हैं।

एक-दूसरे की मदद करते हैं लोग
नेशनल अवार्ड विजेता एक्ट्रेस दिव्या दत्ता ने कहा कि इसमें भी (चक्रवात तौकेते) मैंने देखा है कि जब किसी को किसी चीज की जरूरत होती है तो लोग मदद करते हैं। उन्होंने कहा लोग वास्तव में मदद करने के लिए बाहर चले आए, एक तूफान से निपटने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप इसका सामना करें, आप इसे अनदेखा नहीं करते। जब हम यह नॉर्मली देखते हैं तो ये भूल जाते हैं। हमें महामारी से सीखना चाहिए और यह सबक नहीं भूलना चाहिए।












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