BJP ने यूपी में 2024 की शुरू की तैयारी, सभी 80 लोकसभा सीटें जीतने का क्या है प्लान ? जानिए
भाजपा ने 2024 के लोकससभा चुनावों के लिए उत्तर प्रदेश में जमीनी स्तर पर कार्य करना शुरू कर दिया है। पार्टी सभी 80 सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए बूथ मैनेजमेंट और पन्ना प्रमुखों पर खास जोर है।

भारतीय जनता पार्टी 2024 का लोकसभा चुनाव जीतकर लगातार तीसरी बार केंद्र की सत्ता पर काबिज होना चाहती है। लेकिन, यह तभी संभव है कि उसका उत्तर प्रदेश का मजबूत किला और मजबूत हो। क्योंकि, पिछले दो चुनावों में भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाले उसके नेतृत्व को यूपी के वोटरों ने दिल खोलकर साथ दिया है। लेकिन, पिछले साल यूपी विधानसभा चुनाव में पार्टी की 57 सीटें घट गई थीं। यानि लोकसभा चुनाव में पार्टी कोई जोखिम नहीं ले सकती। यूपी का गढ़ मजबूत रहेगा, तभी तीसरी बार दिल्ली की सत्ता में आने के बारे में सोचा भी जा सकता है। पार्टी मानकर चल रही है कि वह सभी कमियों को दूर कर लेगी। लिहाजा उसने अबकी बार यूपी की सभी 80 लोकसभा सीटों पर भगवा फहराने का मिशन शुरू कर दिया है।

यूपी में भाजपा ने सभी 80 सीटें जीतने का रखा है लक्ष्य
2024 के लोकसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में अभी से जमीनी तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी ने 2014 और 2019 में लगातार दो बार से केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई है तो उसका रास्ता यूपी से होकर ही दिल्ली तक पहुंचा है। पार्टी जानती है कि अगले चुनाव में उसे नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए पार्टी की जीत की बुनियाद के लिए सबसे महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश में इसने इसबार सभी 80 लोकसभा सीटें जीतने का रोडमैप तैयार किया है। डेक्कन हेराल्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी के मिशन 2024 की प्रक्रिया में जुटे कई नेताओं के मुताबिक खासकर उत्तर प्रदेश में जिन बातों पर बीजेपी फोकस कर रही है, उनमें बथू कमिटियां बहुत ही महत्वपूर्ण हैं।

पन्ना प्रमुखों पर भी रहेगा भाजपा का फोकस
मेरा बूथ सबसे मजबूत जैसे अभियानों के अलावा पार्टी ने लाभार्थी सम्मेलनों और खास लोकसभा क्षेत्रों के लिए केंद्रीय मंत्रियों को तैनात करने की भी रणनीति तैयार की है। इसके अलावा भाजपा और आरएसएस की कार्यप्रणाली के मुताबिक संगठन प्रवास की तर्ज पर लोकसभा प्रवास जैसे कार्यक्रमों की भी योजना बनाई गई है। हाल ही में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने प्रदेश कार्यकारिणी में नेताओं से सभी सीटों पर जीत सुनिश्चित करने को कहा है। प्रदेश भाजपा नेताओं का कहना है कि वैसे तो राज्य के सभी 1.75 लाख बूथों पर पार्टी की मौजूदगी है, लेकिन फोकस पन्ना प्रमुखों पर रहेगा। भाजपा के चुनाव अभियान के दौरान पन्ना प्रमुखों यानि मतदाता सूची के एक पेज के इंजार्ज की भूमिका बहुत ही अहम रही है और पार्टी की यह रणनीति चुनाव जीतने में कारगर भी साबित हुई है।

विधानसभा चुनावों में पार्टी की सीटें घटी थीं
पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल का कहना है, '2019 के लोकसभा चुनाव में हम 62 सीटों पर जीते थे और बाकी बचे 18 सीटों के लिए हम बूथ सशक्तिकरण अभियान पर काम कर रहे हैं। प्रदेश के सभी बूथों पर हमारे पास एक बूथ स्ट्रक्चर और शक्ति केंद्र है, लेकिन अब एक अभियान के तहत हम एक पन्ना प्रमुख और बूथ स्ट्रक्चर सुनिश्चित कर रहे हैं।' प्रत्येक बूथ पर मोटे तौर पर 1,000 से 1,200 वोटर हैं। बीजेपी के लिए चुनौती बढ़ी हुई इसलिए है, क्योंकि 2019 में पार्टी 80 में से 62 सीटें जीती थी, लेकिन 2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी की सीटों की संख्या 2017 के मुकाबले 57 घट गई है। विधानसभा की 403 सीटों में से भाजपा को 255 सीटें मिली थी। मेरा बूथ सबसे मजबूत अभियान में जुटे एक नेता ने कहा कि अगर इन 57 हारी हुई सीटों को लोकसभा चुनाव के हिसाब से देखें तो इसका असर लोकसभा की और 10 सीटों पर पड़ सकता है।

केंद्रीय मंत्री भी दे रहे हैं योगदान
बीजेपी की प्रदेश इकाई से जुड़े एक केंद्रीय मंत्री ने बूथ अभियान से पहले बताया था कि चार केंद्रीय मंत्रियों अश्विनी वैष्णव, नरेंद्र सिंह तोमर, अन्नपूर्णा देवी और जीतेंद्र सिंह को 17 लोकसभा सीटों पर तैनात किया गया था, ताकि वे नियमित रूप से पार्टी की पहुंच बढ़ाने के अभियान को आगे लेकर चलें। इस तरह की प्रक्रिया में भाजपा देश के सभी राज्यों में लगी हुई है। लेकिन, यूपी खास है, क्योंकि भाजपा की सत्ता में उत्तर प्रदेश का योगदान सबसे महत्वपूरण है।
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संघ का भी अपने स्तर पर जारी है अभियान
सिर्फ बीजेपी ही नहीं, इसके वैचारिक अगुवा संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक भी अपने स्तर पर अभियानों में जुटा हुआ है। संगठन के बड़े-बड़े नेता हाल-फिलहाल में यूपी में लंबा प्रवास करके गए हैं। आरएसएस के नेता ने कहा है कि अगले साल भव्य राम मंदिर के उद्घाटन से पहले उसकी अयोध्या में कार्यालय खोलने की योजना है। संघ ने पूरे प्रदेश में अपने 125 पदाधिकारियों को जनसंपर्क के कार्यों के लिए लगा रखा है। इसमें मतदाताओं के साथ बातचीत, लाभार्थियों के साथ चर्चा और पूरे प्रदेश में वैचारिक कार्यक्रमों का आयोजन करना शामिल है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत खुद इस समय 1925 में होने वाले संगठन के शताब्दी समारोह की तैयारियों के सिलसिले में चार दिनों के बरेली प्रवास पर हैं।












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