BJP President: कौन होगा भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष? RSS ने तय किए मानदंड, आसान नहीं होगा चयन
BJP President Update News: भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जल्द ही नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने वाला है, लेकिन इस बार चयन की प्रक्रिया बेहद खास और रणनीतिक स्तर पर हो रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने इस पद के लिए कुछ विशेष मापदंड तय किए हैं, जिनके तहत ही नए अध्यक्ष का चयन होगा।
नया BJP अध्यक्ष न सिर्फ एक राजनीतिक चेहरा होगा, बल्कि वह पार्टी की दिशा और दशा तय करने वाला प्रमुख रणनीतिकार भी होगा। भले ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने नए भाजपा अध्यक्ष के लिए कोई निर्दिष्ट नाम नहीं भेजा हो, लेकिन शीर्ष भाजपा पदाधिकारियों का मानना है कि संघ की स्वीकृति अब एक "अलिखित अनिवार्यता" बन चुकी है।

संघ ने बताए भाजपा अध्यक्ष चयन के 4 प्रमुख मानदंड
न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक संघ ने स्पष्ट किया है कि अगला भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष समावेशी, सबके लिए सुलभ, जमीनी स्तर से जुड़े कार्यकर्ता और उम्र 60 वर्ष से अधिक होना चाहिए।
RSS के एक सूत्र के मुताबिक, "इस बार 'सुलभता' पर विशेष जोर दिया गया है। पिछले दस वर्षों में केंद्रीयकृत नेतृत्व शैली के बाद, संघ ऐसा नेता चाहता है जो हाईकमान और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच की खाई को पाट सके। ऐसा व्यक्ति जो सभी संगठनों और कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित कर सके, और जो संगठन के भीतर और बाहर दोनों से सुझाव लेने के लिए तैयार हो।"
RSS सूत्रों के अनुसार, अब पार्टी को ऐसे नेता की जरूरत है जो केवल हाईकमान का प्रतिनिधि न हो, बल्कि जमीनी कार्यकर्ताओं से भी सीधा संवाद रख सके और संगठन को मजबूत कर सके।
भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की रेस में ये नेता सबसे आगे
- अर्जुन राम मेघवाल (केंद्रीय कानून मंत्री)
- शिवराज सिंह चौहान (कृषि मंत्री)
- धर्मेंद्र प्रधान (केंद्रीय शिक्षा मंत्री )
- भूपेंद्र यादव (केंद्रीय पर्यावरण मंत्री)
- मनोहर लाल खट्टर (हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्री)
- सुनील बंसल (राष्ट्रीय महासचिव)
- जी. किशन रेड्डी (कोयला मंत्री)
- बी.एल. संतोष (महासचिव)
- महिला उम्मीदवार के तौर पर निर्मला सीतारमण और डी. पुरंदेश्वरी
आखिर भाजपा के नए अध्यक्ष के चुनाव में क्यों हो रही है देरी?
जेपी नड्डा का कार्यकाल 2023 में खत्म हो गया था, लेकिन लोकसभा चुनाव 2024 को ध्यान में रखते हुए उनका कार्यकाल बढ़ा दिया गया। अब संगठन चुनाव की प्रक्रिया और RSS से अंतिम सहमति नहीं बनने के कारण नए अध्यक्ष की घोषणा जुलाई के अंत या अगस्त के पहले सप्ताह तक टल सकती है।
इसके अलावा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और तेलंगाना जैसे बड़े राज्यों में अभी तक प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव पूरे नहीं हुए हैं। BJP के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले कम से कम आधे राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों का चयन होना आवश्यक है।
एक वरिष्ठ भाजपा नेता के मुताबिक, "घोषणा में देरी केवल नाम तय करने की बात नहीं है। यह उस नाम को एक बड़े राजनीतिक समीकरण में फिट करने की कोशिश है, जो भाजपा की 2029 की लंबी रणनीति से जुड़ा हुआ है।"
उन्होंने आगे कहा, "इस फैसले को सिर्फ एक खाली पद भरने के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि यह संघ के शताब्दी वर्ष और मोदी युग के बाद के राजनीतिक चरण के अनुसार पार्टी के नेतृत्व को परिभाषित करने वाली रणनीतिक चाल के रूप में देखा जा रहा है। लोग अक्सर इसे जातिगत संतुलन या क्षेत्रीय समीकरण के रूप में देखते हैं, लेकिन असली गणित उससे कहीं अधिक गहराई वाला है।"












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