अब इस बीजेपी सांसद ने मोदी सरकार को घेरने का प्लान बनाया है, बढ़ेगी केंद्र की मुश्किल
बीजेपी की सांसद सावित्री बाई फुले 1 अप्रैल को लखनऊ में भारतीय संविधान आरक्षण बचाओ रैली करेंगी
नई दिल्ली। सहयोगियों दलों से झटका मिलने के बाद बीजेपी को अपने सांसद भी झटका दे रहे हैं। उधर उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से बीजेपी सांसद सावित्री बाई फुले अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खेलने जा रही हैं। बीजेपी सांसद ने प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऐलान किया कि वह 1 अप्रैल को सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू करेंगी। फुले की यह रैली केंद्र सरकार की एससी-एसटी विरोधी नीतियों के खिलाफ होगी। केंद्र में बीजेपी की सरकार बनने के बाद यह पहला ऐसा मौका है जब पार्टी की सांसद अपनी सरकार के खिलाफ दलितों के मुद्दे पर रैली करने जा रही हैं। बीजेपी सांसद की इस रैली से विपक्ष के केंद्र सरकार के दलित विरोधी होने के आरोपो को बल मिलेगा।

लखनऊ में भारतीय संविधान आरक्षण बचाओ रैली
बीजेपी की सांसद सावित्री बाई फुले 1 अप्रैल को लखनऊ में भारतीय संविधान आरक्षण बचाओ रैली करेंगी। यह रैली नमो बुद्धाय जनसेवा समिति की ओर से आयोजित की जा रही है और वह उसका हिस्सा होंगी। बीजेपी एमपी का आरोप है कि केंद्र सरकार की नीतियां अनुसूचित जाति/ जनजाति (SC/ST) के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान और आरक्षण में लगातार समीक्षा की बात हो रही है। सरकार आरक्षण समाप्त करने की बात भी कह रही है। वह इसके खिलाफ हैं। आरक्षण को लेकर वह सरकार के खिलाफ भी जाने को तैयार हैं।

बीजेपी में विरोध के सुर उठने लगे हैं
SC/ST (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति) एक्ट के प्रावधानों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में विरोध के सुर उठने लगे हैं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के तत्काल बाद जहां पार्टी के दलित सांसदों ने सामाजिक न्याय मंत्री से मिलकर इसके खिलाफ समीक्षा याचिका दायर किए जाने की मांग रखी वहीं अब पार्टी की सांसद ने बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इससे पहले गुजरात में दलितों के खिलाफ हुई हिंसा को लेकर बीजेपी के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो चुका है वहीं महाराष्ट्र में भी भीमा-कोरगांव हिंसा को लेकर राज्य सरकार दलित संगठनों के निशाने पर है।

ये है सुप्रीम कोर्ट का फैसला
अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (एससी/एसटी एक्ट-1989) के प्रावधानों पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय के बाद राजनीतिक दलों के साथ-साथ कई संगठन भी इसका विरोध कर रहे हैं। इनका मानना है कि एक्ट में बदलाव से दलितों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। विपक्षी दलों के अलावा सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कई दलित सांसदों ने भी सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय पर सरकार से पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की मांग की है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट के दुरुपयोग का हवाला देते हुए तत्काल गिरफ्तारी के प्रावधान पर रोक लगा दी थी, साथ ही कोर्ट ने ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत का प्रावधान भी जोड़ दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि मामला दर्ज होने के पहले जांच की जाएगी उसके बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।












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