क्या है विधानसभा चुनावों वाले 5 राज्यों में महिला वोटरों तक पहुंचने के लिए बीजेपी का मेगा प्लान?
इस साल नवंबर-दिसंबर तक पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसमें राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम शामिल हैं। इन चुनावों के लिए बीजेपी महिला मोर्चा ने अभी से कमर कस ली है।
महिला वोटरों को बीजेपी से जोड़ने के लिए भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष वनथी श्रीनिवासन ने खुद ही कमान संभाला है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में उन्होंने बुधवार को कहा है कि महिलाएं पार्टी से जुड़ें इसके लिए उनका मोर्चा बूथ स्तर तक काम करेगा।

विधानसभा चुनावों के लिए बीजेपी महिला मोर्चा सक्रिय
इससे एक दिन पहले ही बीजेपी महिला मोर्चा की ओर से छत्तीसगढ़ के नक्सली इलाके में तैनात जवानों के लिए 5 हजार राखी भेजे गए थे। छत्तीसगढ़ अकेले नहीं है। पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में भी पार्टी का महिला मोर्चा चुनावों को देखते हुए खूब सक्रिय है। गुरुवार को भोपाल में मोर्चा की एक बड़ी बैठक रखी गई है। रायपुर के बाद श्रीनिवासन यहां भी पार्टी की महिला कार्यकर्ताओं को चुनावी टिप्स देने वाली हैं। शिवराज सिंह चौहान सरकार की लाड़ली बहन योजना ने इन्हें महिला वोटरों तक अपनी बात पहुंचाने का एक बढ़िया आधार भी दे दिया है।
महिलाओं के खिलाफ हिंसा को बना रही है मुद्दा
राजस्थान में तो बीजेपी महिला मोर्चा का तेवर मौजूदा अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ काफी आक्रामक है। वहां हाल के समय में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की घटनाओं ने इसके लिए एक बड़ी जमीन तैयार कर दी है। कांग्रेस सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों के माध्यम से बीजेपी महिलाओं के मुद्दे उठा रही है। मणिपुर की घटना को लेकर कांग्रेस की आवाज का जवाब देने के लिए उसके पास इस समय राजस्थान से बेहतर हथियार नजर नहीं आ रहा है।
आधी आबादी पर फुल फोकस
बीजेपी का लक्ष्य एक है, आधी आबादी पर फुल फोकस। इसमें महिला मोर्चा की मदद की दरकार इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि बीजेपी-विरोधी दलों ने मणिपुर की घटना को लेकर उसे जमकर घेरने की कोशिश की है। जानकारी के मुताबिक इसके लिए मोर्चा की कार्यकर्ताओं की ओर से रिक्शा वालों से लेकर डिलिवरी बॉयज तक को राखी बांधने की योजना है।
फर्स्ट टाइम महिला वोटरों पर नजर
पार्टी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष पहले मीडिया को दिए इंटरव्यू में कह चुकी हैं, कि 18 साल से 25 साल के बीच की पहली बार की महिला वोटर उनका टारगेट हैं। उनकी कार्यकर्ता प्रत्येक विधानसभा क्षेत्रों में ऐसे कम से कम एक हजार वोटरों तक पहुंचने की कोशिश करेंगी। चुनावी राज्यों में इन वोटरों तक पहुंच बनाने के लिए कॉलेज और शिक्षण संस्थाओं में भी जाएंगी।
धार्मिक आयोजनों पर भी नजर
जब नवरात्रि का समय नजदीक आएगा तो महिला मोर्चा की कार्यकर्ता धार्मिक आयोजनों में भी शामिल होंगी। इसके लिए कमल-कीर्तन जैसे आयोजनों को मतदाता-संपर्क का एक बड़ा माध्यम बनाने की तैयारी की गई है। गुजरात विधानसभा चुनावों के दौरान इस तरह के कार्यक्रमों को काफी सफलता भी मिल चुकी है।
वहीं तेलंगाना और मिजोरम में पार्टी स्थानीय त्योगहारों के हिसाब से अपनी रणनीति को आगे बढ़ा सकती है। मसलन, तेलंगाना में बथुकम्मा उत्सव लोकप्रिय है तो मिजोरम में आदिवासी त्योहारों पर जोर देने की रणनीति है। जानकारी के मुताबिक चुनावी राज्यों में बीजेपी ऐसे कार्यक्रमों के लिए 25 हजार क्षेत्रीय केंद्रों पर फोकस कर सकती है, जिसे वह शक्ति केंद्र के नाम से बुलाती है।
महिलाओं को समर्पित वोटर माना जाता है
बीजेपी नेताओं का कहना है कि महिलाओं का मुद्दा उठाना यूपी विधानसभा चुनावों में काफी कारगर साबित हुआ है। दरअसल, महिला वोटरों को स्वाभाविक तौर पर काफी समर्पित माना जाता है और कहा जाता है कि लाभार्थी योजनाओं की वजह से बीजेपी को इसका काफी फायदा मिला भी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सियासी ताकत के पीछे भी महिलाओं का समर्थन माना जाता है। बीजेपी भी इस चीज को बखूबी समझ चुकी है, इसलिए उसने अपने महिला मोर्चा को अभी से चुनावी राज्यों में पूरी तरह से ऐक्टिवेट कर दिया है।












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