अमित शाह की इस रणनीति ने मुस्लिम इलाकों में बीजेपी को दिलाई बंपर जीत

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में देश के उच्च मुस्लिम आबादी वाली एक तिहाई लोकसभा सीटों पर भारी जीत दर्ज की है। द प्रिंट के डेटा के मुताबिक, मुस्लिम बहुल वाली 65 सीटों में से एनडीए ने 27 सीटों पर अपना कब्जा जमाया है। जोकि इन 65 सीटों का कुल लगभग 37 फीसदी है। इन सीटों पर 2011 की जनगणना के हिसाब से 25 फीसदी वोटर मुस्लिम थे। ये 65 लोकसभा सीटे देश की 13 अलग-अलग राज्यों में थी।

इन राज्यों में बीजेपी ने अकेले 24 सीटें जीतीं

इन राज्यों में बीजेपी ने अकेले 24 सीटें जीतीं

ये 65 सीटें तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, झारखंड, उत्तराखंड़, मणिपुर, केरल, जम्मू कश्मीर और महाराष्ट्र राज्यों से आती हैं। इसके अलावा इसमें दो केंद्रशासित प्रदेश दिल्ली और लक्ष्यद्वीप भी शामिल हैं। इन राज्यों में बीजेपी ने अकेले 24, बिहार में उसकी सहयोगी जेडीयू ने और महाराष्ट्र में बीजेपी की सहयोगी शिवसेना ने एक सीट पर दर्ज की है। शेष सीटें कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, बदरुद्दीन अजमल की AIUDF, असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM, बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जीतीं।

हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण का बीजेपी को हुआ सीधा फायदा

हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण का बीजेपी को हुआ सीधा फायदा

इन आंकड़ों से पता चलता है कि, इससे पता चलता है कि भाजपा के मूल आधार हिंदू वोटों का कैसे ध्रुवीकरण हुआ। जिसका उसका सीधा फायदा भी मिला। भाजपा ने 1990 के दशक में हिंदुत्व को अपनी राजनीति का मुख्य हिस्सा बनाया था। अभी भी पार्टी अपनी हिंदुत्व की राजनीति को आगे बढ़ा रही है, और यह चुनाव भी इससे अलग नहीं था।नागरिकता को धर्म आधारित मुद्दा बनाने, गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता का वादा करने और अली बनाम बजरंग बली के मुद्दे को हवा देकर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली पार्टी चुनाव में ध्रुवीकरण करने कोशिश में सफल रही।

बीजेपी में हिंदू वोटरों को एक साथ लाने में सफल रही

बीजेपी में हिंदू वोटरों को एक साथ लाने में सफल रही

जिन सीटों पर मुस्लिम आबादी में अधिक थे, वहां पर बीजेपी में हिंदू वोटरों को एक साथ लाने में सफल रही। जिससे उसका स्ट्राइक रेट बढ़ गया। ऐसा ही उत्तर प्रदेश में भी सपा-बसपा गठबंधन ने किया। वे कांग्रेस ने मुस्लिम वोटों का अपने पक्ष में लाने में सफल रहीं। इसी तरह का कुछ असम के करीमगंज लोकसभा सीट पर देखने को मिला। यहां पर कांग्रेस और AIUDF ने गठबंधन कर मुस्लिम वोटों को एकजुट कर लिया था।

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