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उत्तर प्रदेश में भाजपा के नए अध्यक्ष के लिए कौन-कौन हैं दावेदार, जानिए खूबियां

लखनऊ : ऊतर प्रदेश में बीजेपी को ऐसे प्रदेश अध्यक्ष की तलाश है जो 2022 तक राजनीति की पिच पर मजबूती से टिका रहे। महेंद्र नाथ पांडेय के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रहते पार्टी ने लोकसभा की 62 सीटें जीती। लगातार दूसरी बार चन्दौली सीट जीत कर महेंद्र नाथ पांडेय ने 21 साल का रिकार्ड तोडा। यह अलग बात है कि चंदौली में लगातार दूसरी बार महेंद्र नाथ पांडेय चुनाव जीत गए लेकिन वो चित होते होते बचे। प्रदेश में अच्छे प्रदर्शन का कुछ इनाम तो उन्हें मिलना ही था। लिहाजा इसबार महेंद्र नाथ पांडेय को प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री का ओहदा मिला। सही मायने में उत्तर प्रदेश में बीजेपी को 62 सीट महेंद्र नाथ पांडेय की वजह से नहीं बल्कि नरेन्द्र मोदी के चेहरे और अमित शाह की चतुर रणनीति की बदौलत मिली। अब नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए माथा-पच्ची चल रही है। उत्तर प्रदेश में टीम तैयार है, बस उसे अपने ऐसे अध्यक्ष का इंतज़ार है जो 2022 तक लगातार प्रदेश राजनीति की पिच पर बल्लेबाजी कर सके। पहले 12 सीटों के उपचुनाव के अभ्यास मैच जीते फिर करीब तीन साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के फाइनल में 2017 जैसा या उससे बेहतर परिणाम दे।

उपचुनावों के मद्देनजर बड़ी होगी चुनौती

उपचुनावों के मद्देनजर बड़ी होगी चुनौती

चुनौती बड़ी है। "एक के साधे सब सधें" की तर्ज पर बीजेपी को उत्तर प्रदेश के लिए ऐसे बड़े चेहरे की तलाश है जो 2017 के प्रदर्शन को दोहरा सके। ऐसा लगता है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा के बाद ही उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष की घोषणा हो सकती है। लोकसभा चुनाव के बाद प्रमुख विभागों के बंटवारे और अध्यक्ष के नाम को लेकर राजनीति के बड़े बड़े विद्वान गच्चा खा गए थे। अमित शाह गृहमंत्री बन गए लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन बनेगा, इस पर अभी भी अटकलें जारी हैं। हरियाणा विधान सभा का कार्यकाल इसी साल अक्टूबर में पूरा हो रहा है और महारष्ट्र का नवम्बर में। दिल्ली, बिहार और झारखण्ड में अगले साल विधान सभा का कार्यकाल पूरा होना है। सम्भव है इन राज्यों में चुनाव के साथ ही उत्तर प्रदेश में उपचुनाव भी हों। इन चुनावों के मद्देनजर एक आकलन यह भी है की अमित शाह राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहें और उनकी मदद के लिए दो कार्यकारी अध्यक्ष बनाये जाएँ। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष ऐसा हो जिसका इस्तेमाल बीजेपी दूसरे राज्यों के विधान सभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रभावशाली ढंग से कर सके।

ये भी पढ़ें: अगले 6 महीने तक भाजपा अध्यक्ष बने रहे सकते हैं अमित शाह- सूत्र

जिसके पास हो एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर की काट

जिसके पास हो एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर की काट

पिछले विधान सभा चुनाव में बीजेपी ने 325 सीट हासिल कर प्रचंड जीत दर्ज की थी। प्रदेश में सपा, बसपा और कांग्रेस हाशिये पर चले गए थे। इस लिए 2022 के विधान सभा चुनाव में इन दलों के पास खोने को कुछ नहीं होगा। जबकि बीजेपी को पूरे पांच साल का रिपोर्ट कार्ड देना होगा। प्रचंड जीत के बाद जनता की अपेक्षाएं भी प्रचंड हो जाती हैं। ऐसे में एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर की काट प्रदेश अध्यक्ष को खोजनी होगी। वर्तमान राजनितिक परिस्थितियों को देख कर लगता है कि प्रदेश में प्रमुख दल सपा, बसपा और कांग्रेस अपने दम पर ही चुनाव लड़ेंगे। इनकी ताकत मुस्लिम, ओबीसी और अनुसूचित जाति/जनजाति के वोटर हैं। यह सच है कि लोकसभा चुनाव में इस बार जाति और धर्म का असर कम दिखा लेकिन विधान सभा चुनाव में स्थानीय मुद्दे और जातीय समीकरण अहम होते हैं। बीजेपी ऐसे चेहरे की तलाश में है जो इन सभी मोर्चों को सम्भाल सके।

सरकार और संगठन में तालमेल वाला आलराउंडर

सरकार और संगठन में तालमेल वाला आलराउंडर

इस लिहाज से प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में पह्ला नाम डॉ महेश शर्मा का है। लोकसभा चुनाव के बाद जब मंत्रिमंडल की घोषणा हुई तो उसमें डॉ महेश शर्मा का नाम न होने से सभी चौंके थे। इसके बाद से अटकलें लगाने लगीं कि डॉ शर्मा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है। वह बीजेपी के मूल कैडर से आते हैं और उनकी साफ-सुथरी छवि है। ब्राह्मण चेहरों में दूसरा बड़ा नाम शिव प्रताप शुक्ल का है। हालांकि बीजेपी ऐसा प्रदेश अध्यक्ष चाहती है जो सरकार और संगठन में बेहतर तालमेल के साथ काम करे और उसकी कार्यकर्ताओं में अच्छी पकड़ हो। सवर्णों में तीसरा बड़ा नाम मनोज सिन्हा का है। वह लोकसभा चुनाव हार गए थे लेकिन उनकी प्रशासनिक क्षमता, साफ़ छवि और नरेन्द्र मोदी- अमित शाह से करीबी उन्हें भी अध्यक्ष पद का दावेदार बनती है।

दौड़ में मंत्री, सांसद से लेकर एमएलसी तक

दौड़ में मंत्री, सांसद से लेकर एमएलसी तक

सूत्रों के मुताबिक यूपी बीजेपी अध्यक्ष की रेस में योगी सरकार में मंत्री और सांसद से लेकर एमएलसी तक हैं। इनमें स्वतंत्र देव सिंह ओबीसी वर्ग से एक प्रभावशाली नाम है। कुर्मी समुदाय में इनका अच्चा प्रभाव है। 2019 के लोकसभा चुनाव में स्वतंत्र देव सिंह को मध्य प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और उन्होंने बखूबी अपनी जिम्मेदारी निभाई और मध्य प्रदेश में बीजेपी ने 29 में से 28 सीटें जीती। इस कारण स्वतंत्र देव सिंह की दावेदारी भी मजबूत हुई है।

चौंकानेवाला हो सकता है फैसला

चौंकानेवाला हो सकता है फैसला

दलित चेहरों में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री विधान परिषद सदस्य विद्यासागर सोनकर और लक्ष्मण आचार्य का नाम भी चर्चा में है। सोनकर के पास लखनऊ और मोहनलालगंज लोकसभा सीट का भी प्रभार था। यह दोनों सीट बीजेपी के खाते में गईं और सोनकर अपनी जिम्मेदारी पर खरे उतरे । यूपी का नया बीजेपी अध्यक्ष कौन होगा, इस बारे में कोई नेता बोलने को तैयार नहीं है क्योंकि बड़े बड़े विद्वान लोकसभा चुनाव में अटकले लगा कर गच्चा खा चुके हैं। सम्भावना यह भी है की अमित शाह किसी ऐसे नेता प्रदेश अध्यक्ष बना दें जिसकी राजनीतिक गलियारों में चर्चा ही नहीं हो।

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