'अबकी बार, 400 पार', क्या है बीजेपी के इस नारे के पीछे की वजह? पार्टी के नेता ने खोला राज
Lok Sabha Election: लोकसभा चुनाव के साथ में से पांच चरणों के लिए मतदान संपन्न हो चुका है। इस बार आम चुनाव में बीजेपी ने अपने लिए 370 जबकि एनडीए के लिए कुल 400 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। एनडीए के 'अबकी बार, 400 पार' के नारे को लेकर अक्सर विपक्ष निशाना साधती रही है।
विपक्ष ये भी दावा कर रही है कि बीजपी 400 सीटें पार कर के संविधान बदलना चाहती है और आरक्षण खत्म करना चाहती है। विपक्ष का दावा है कि देश में तानाशाही व्यवस्था स्थापित करने के लिए एनडीए का 400 सीटें पार करने का लक्ष्य है।

झारखंड के गोड्डा लोकसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी और पार्टी नेता निशिकांत दुबे ने 400 सीटें पार करने के लक्ष्य के पीछे की वजह बताई है। उन्होंने बताया है कि उनके दल को आखिर 400 सीटों की जरूरत क्यों है! निशिकांत दुबे का कहना है कि एनडीए-बीजेपी को 400 सीटें इसलिए चाहिए, ताकि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) को भारत में मिलाया जा सके।
निशिकांत दुबे ने इस बारे में एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन/ बीजेपी को 400 लोकसभा की सीट पाकिस्तान के कब्जे में स्थित जम्मू-कश्मीर के हिस्से को भारत में लाने के लिए आवश्यक है।"
संविधान बदलने के लिए इन्हें चाहिए 400 पार सीटें: राहुल गांधी
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वायनाड-रायबरेली से पार्टी के उम्मीदवार राहुल गांधी ने कुछ हफ्ते पहले मध्य प्रदेश के रतलाम में एक रैली को संबोधित करते हुए बीजेपी के 400 पार के नारे पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि बीजेपी नेता संविधान बदलने के लिए 400 सीटों का नारा लगा रहे हैं।
राहुल ने कहा था, "बीजेपी नेताओं ने साफ कहा है कि अगर वे सत्ता में आते हैं तो संविधान को किनारे कर देंगे। यही वजह है कि उन्होंने 400 पार का नारा दिया है। बीजेपी नेता कह रहे हैं कि वे आरक्षण छीनने वाले हैं।" इस के साथ ही राहुल ने यह वादा किया था कि वह आरक्षण की 50 फीसदी की सीमा को भी बढ़ाएंगे।
पीएम ने कहा- संविधान की रक्षा के लिए दे दूंगा जीवन का बलिदान
विपक्ष के इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि वह संविधान की रक्षा के लिए अपने जीवन का बलिदान भी दे देंगे। इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने कहा, "कांग्रेस ने खुद ही संविधान पर हमला किया था। वह समय अब जा चुका है। यही वजह है कि मैं आज कहता हूं कि जब तक मोदी जीवित है, मैं इस संविधान के लिए लड़ूंगा और यहां तक कि अपने जीवन का बलिदान भी दे दूंगा।"












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