पीएम मोदी के ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा के दावे की हवा निकली

भाजपा नेता पर लगा 5.6 करोड़ रुपए की घूस लेने का आरोप, कांग्रेस ने की मोदी सरकार से सीबीआई जांच की मांग

नई दिल्ली। ना खाऊंगा ,ना खाने दूंगा का नारा देने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके ही नेता चुनौती दे रहे हैं। भाजपा की जांच कमेटी में इस बात की पुष्टि हुई है कि केरल में पार्टी के नेता ने एक व्यापारी से मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की स्वीकृति दिलाने के लिए 5.60 करोड़ रुपए की रिश्वत ली है। स्थानीय मीडिया ने इस खबर को दिखाते हुए दावा किया था कि भाजपा नेता ने व्यापारी को संस्थान की मान्यता दिलाने के लिए रिश्वत ली है।

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जांच रिपोर्ट मीडिया में लीक

जांच रिपोर्ट मीडिया में लीक

इन आरोपों के बाद भाजपा ने एक जांच कमेटी का गठन किया था, जिसकी रिपोर्ट मीडिया में लीक होने के बाद पार्टी को बड़ी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी के ही भीतर के एक नेता ने इस रिपोर्ट को लीक किया है। वहीं इस मामले में विपक्षी दल के नेताओं ने जांच की मांग की है, नेताओं ने इस मामले के सामने आने के बाद मोदी सरकार पर निशाना साधा है। इन्होंने मांग की है कि मोदी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने की बात करती है, लिहाजा इस मामले की जांच होनी चाहिए।

खोखले हैं भाजपा के दावे

खोखले हैं भाजपा के दावे

कांग्रेस नेता रमेश चेन्नीथला ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए खहा कि भाजपा का भ्रष्टाचार के खिलाफ जो दावा था उसकी पोल खुल गई है। हम इस मामले में सीबीआई जांच चाहते हैं। वहीं इस पूरे मुद्दे पर भाजपा के खेमे ने चुप्पी साध रखी है, माना जा रहा है कि विपक्षी दल संसद के मानसून सत्र में भी इस मुद्दे को उठा सकते हैं।

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    हवाला के जरिए पहुंचा पैसा

    हवाला के जरिए पहुंचा पैसा

    स्थानीय मीडिया का कहना है कि भाजपा के कोऑपरेटिव सेल के संयोजक आर एस विनोद ने इस बात को स्वीकार किया है कि वरकला में एसआर हॉस्पिटल को मेडिकल कॉलेज की मान्यता दिलाने के लिए रिश्वत ली है। विनोद ने यह पैसा दिल्ली में एक दलाल के जरिए हवाला के रास्ते यह पैसा पहुंचाया।

    मान्यता के लिए दिए 5.6 करोड़

    मान्यता के लिए दिए 5.6 करोड़

    प्रदेश भाजपा अध्यक्ष कुम्मानम राजशेखरन ने इस मामले की जांच के लिए दो सदस्यों का एक पैनल बनाया था। आर शाजी जोकि एसआर एजूकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन हैं। उनपर आरोप है कि उन्होंने 5.60 करोड़ रुपए एमसीआई की स्वीकृति के लिए बतौर रिश्वत दिए थे। आपको बता दें कि एमसीआई भारत में मेडिकल व डेंटल एजुकेशन की मान्यता देने वाली सरकारी संस्था है।

    अमित शाह को भी लिखा पत्र

    अमित शाह को भी लिखा पत्र

    पार्टी क सूत्रों की मानें तो जब शाजी को मेडिकल कॉलेज की एमसीआई की ओर से मान्यता नहीं मिली तो उन्होंने सार्वजनिक रूप से इसके खिलाफ अपनी बात रखी, यही नहीं उन्होंने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को एक पत्र खा था, जिसके बाद अमित शाह ने राजशेखरन को पत्र लिखकर मामले की जांच की बात कही थी।

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