2019 के चुनावों को लेकर यूपी में बीजेपी का मास्टर प्लान, हर सीट के लिए खास रणनीति
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटें काफी हद तक तय करती हैं कि, केंद्र में किस पार्टी की सरकार बनेगी। राजनीतिक तौर पर काफी अहम माने जाने वाले उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। भाजपा और आरएसएस के नेतृत्व वाला संघ परिवार पिछले कुछ महीनों से एक योजना पर जोर-शोर से काम कर रहे हैं, जिसमें 80 निर्वाचन क्षेत्रों में नेताओं और कैडर की तैनाती और लोगों के बीच किन-किन मुद्दों की ज्यादा चर्चा है, इसके लिए ग्राउंड जीरो से फीडबैक लेने की योजना पर काम किया जा रहा है।

झड़पिया की नियुक्ति का मकसद पार्टी के भीतर गुटबाजी को खत्म करना
गुजरात के पूर्व गृह मंत्री गोवर्धन झड़पिया की बुधवार को हुई नियुक्ति इसी रणनीति का एक हिस्सा माना जा रहा है। झड़पिया की नियुक्ति का मुख्य मकसद पार्टी के भीतर गुटबाजी को खत्म करना और क्षमतावान नेताओं का भरपूर लाभ उठाना है। झड़पिया चुनावों से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से असंतुष्ट पार्टी के कई नेताओं को साधने की कोशिश करेंगे।यूपी में देश के किसी भी अन्य राज्य के मुकाबले सबसे ज्यादा 80 लोकसभा की सीटें हैं। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने 73 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

फीडबैक के आधार पर टिकटों का बंटवारा
2019 के चुनावों में बीजेपी शायद ही इससे अच्छा प्रदर्शन कर पाए। क्योंकि, राज्य में एसपी और बीएसपी के गठबंधन में चुनाव लड़ने जा रही हैं। ऐसे में पार्टी ने नुकसान को कम से कम करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। बताया जा रहा है कि, हाल ही के दिनों में आरएसएस और वीएचपी जैसे संगठन ना सिर्फ अयोध्या में राममंदिर मुद्दे पर मुखर हुए हैं बल्कि जमीन पर भी इस मुद्दे को लगातार लोगों के बीच उठा रहे हैं। यूपी की जिन 71 सीटों पर बीजेपी ने पिछली बार जीत हासिल की थी, उन सभी सीटों पर आरएसएस प्रभारियों की नियुक्ति हो चुकी है। प्रभारी संबंधित सांसद के प्रदर्शन और इस बार उनके जीतने की संभावना को लेकर फीडबैक ले रहे हैं। इसी फीडबैक के आधार पर टिकटों का बंटवारा किया जाएगा।

टिकट बंटवारे में आरएसएस का होगा अहम रोल
आरएसएस के संयुक्त महासचिव कृष्ण गोपाल यूपी के घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और उनके ही शब्द आगामी चुनावों में कई लोगों के भाग्य का निर्धारण करेगे। आरएसएस भी बीजेपी को सलाह देती रही है कि चुनाव में कौन से मुद्दे प्रासंगिक हैं और कहां पार्टी पिछड़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब भी राज्य में बेहद लोकप्रिय हैं, फिर भी बीजेपी कोई चांस नहीं लेना चाह रही है। इसका अंदाजा उनके निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में तैनात बीजेपी नेताओं की तादाद से लग सकता है।

वाराणसी की परियोजनाओं पर कई नेता कर रहे हैं देखरेख
गुजरात के नवसारी के सांसद सीआर पाटिल वाराणसी में चल रही परियोजनाओं की देखरेख के लिए अक्सर शनिवार-रविवार को शहर में होते हैं। वाराणसी के पास गाजीपुर से सांसद मनोज सिंह और प्रदेश भाजपाध्यक्ष और चंदौली से सांसद महेंद्रनाथ पांडे भी यहां के कामकाम की देखरेख में शामिल रहते हैं। झड़पिया खुद 2014 के चुनावों में वाराणसी में काम कर चुके हैं और बाद में उन्होंने सूबे में किसानों और पिछड़ी जातियों के बीच काम किया था।












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