कौन बनेगा मुख्यमंत्री ? दिल्ली में भाजपा-कांग्रेस परेशान

नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) आम आदमी पार्टी (आप) के कारण दिल्ली में कांग्रेस और भाजपा दोनों के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई हैं विधान सभा चुनावों से पहले। इन दोनों दलों पर भी दबाव है कि ये अपने संभावित मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा करें। आप में तो मुख्यमंत्री पद के एकमात्र दावेदार अरविंद केजरीवाल हैं।

पर दिक्कत यह है कि इन दोनों दलों में आपसी खींचतान के चलते इनके लिए यह करना मुश्किल हो रहा है। अगर भाजपा की बात करें तो यहां पर कोई भी नेता इस तरह का सामने नहीं आ रहा है,जिसके नाम पर पार्टी के सभी नेता सहमत हो जाएं। डा. हर्षवर्धन पर सहमति हो सकती थी, पर उन्हें कैबिनेट में शामिल कर लिया गया है।

मुखी को टिकट मिलना मुश्किल हुआ

जगदीश मुखी को पिछले विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी में मुख्यमंत्री के दावेदार के रूप में उभरे थे। ताजा सूरते -हाल यह है कि उनको टिकट मिलना भी कठिन लगता है। पार्टी में एक राय यह भी बन रही है कि 70 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं को टिकट ना दिया जाए। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाधयाय के नाम पर भी एक राय बनती नजर आ रही।

कांग्रेस में कोई एक राय नहीं

कांग्रेस की भी हालत भाजपा की तरह की है। इसमें पिछली विधानसभा में 8 विधायक थे। जानने वाले जानते हैं कि आठों विधायकों के रास्ते अलग-अलग रहे। इन हालतों में किसी को मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता।

आप ने की ग्रामीणों की बात

इस बीच,आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली ग्रामीण मोर्चे का गठन किया है। यह मोर्चा दिल्ली के गांववालों की समस्याओं पर ध्यान देगा। पार्टी ने राजधानी के किसानों को एकत्र कर ‘आप' संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 15 सूत्रीय एजेंडा पेश किया। कार्यक्रम में दिल्ली ग्रामीण मोर्चे का प्रभारी नवीन जयहिंद, अध्यक्ष हरिराम खत्री व संयोजक दीप कुमार को बनाया गया है।

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