Bipin Rawat Birth Anniversary: 'माचिस की डिब्बी' का वो जवाब, जिसे देकर सेना में अफसर बने थे बिपिन रावत
बिपिन रावत का जन्म 16 मार्च 1958 को हुआ था। उनका जीवन आज भी लोगों को प्रेरणा देता है। उन्होंने एक कार्यक्रम में अपने इंटरव्यू का किस्सा शेयर किया था।

भारतीय सेना के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत 8 दिसंबर 2021 को अपनी पत्नी के साथ तमिलनाडु में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने गए थे। तभी अचानक से मौसम खराब हुआ और उनका हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया। उनके साथ 12 अन्य लोगों की भी जान गई, जो उस हेलीकॉप्टर में सवार थे। उत्तराखंड के एक सामान्य परिवार में जन्मे बिपिन रावत बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उनका जीवन आज भी लोगों को प्रेरणा देता है। आइए जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ खास बातें-
बिपिन रावत का परिवार मूलत: उत्तराखंड का रहने वाला है। उनका जन्म 16 मार्च 1958 को देहरादून में हुआ। उनके पिता फौजी थे और वो लेफ्टिनेंट जनरल के पद तक गए, ऐसे में उनको देखकर बचपन में ही बिपिन रावत का टारगेट सेट हो गया था। उन्होंने शुरुआती पढ़ाई सेंट एडवर्ड स्कूल शिमला से की। इसके बाद वो यूपीएससी की ओर से आयोजित नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) की परीक्षा में बैठे। लिखित परीक्षा पास करने के बाद वक्त था इंटरव्यू का। वहां पर एक दिलचस्प सवाल पूछा गया, जिसका जिक्र जनरल रावत ने कई बार किया।

जनरल रावत ने एक बार बताया था कि एनडीए की लिखित परीक्षा के बाद उनको एसएसबी के लिए इलाहाबाद भेजा गया। वहां पर आखिरी पड़ाव इंटरव्यू का था। सभी को एक-एक करके कमरे में बुलाया जा रहा था और सबसे अलग तरह के सवाल हो रहे थे। जब वो अंदर पहुंचे तो देखा कि एक ब्रिगेडियर रैंक के अधिकारी वहां बैठे थे। उन्होंने शुरुआत सामान्य सवालों से की, जिसका उत्तर वो आसानी से देते चले गए।
इस बीच उन्होंने उनकी हॉबी पूछ ली, जिस पर उन्होंने ट्रैकिंग बताया। अब बारी ऐसे सवाल की थी, जो उनका करियर तय करने वाला था। इंटरव्यू लेने वाले ने पूछा कि अगर आप चार-पांच दिन की ट्रैकिंग पर जा रहे, तो एक महत्वपूर्ण सामान का नाम बताई, जो आप जरूर ले जाएंगे? इस सवाल का उन्होंने साधारण सा जवाब दिया- माचिस।

अब सारा इंटरव्यू माचिस पर ही केंद्रित हो गया। इंटरव्यू लेने वाले ने पूछा कि आप माचिस ही क्यों चुनेंगे, उसकी जगह चाकू, किताब आदि ले जा सकते हैं। जिस पर बिपिन रावत ने उस युग का उदाहरण दिया, जब आग की खोज हुई थी। साथ ही उनको समझाया कि कैसे आग ने मनुष्य के विकास में मदद की। उन्होंने बताया कि जिस हालात की बात की जा रही, उसमें माचिस सबसे ज्यादा जरूरी है। वहां मौजूद ब्रिगेडियर उन पर फैसला बदलने के लिए दबाव डालते रहे, लेकिन वो माचिस पर ही अड़े रहे।
लोगों को दी ये सीख
जनरल रावत के मुताबिक वो पल उस इंटरव्यू में खास था। ब्रिगेडियर इतने ज्यादा प्रभावित हुए कि उनको अच्छे अंक दिए और वो एनडीए के लिए सेलेक्ट हो गए। जनरल रावत ने उस कार्यक्रम में मौजूद लोगों को एक सीख भी दी। उन्होंने कहा कि इंटरव्यू लेने वाले चाह रहे थे कि मैं दबाव में फैसला बदल लूं लेकिन मैं अडिग रहा। उन्हें ये भी लगता था कि अगर वो माचिस की जगह बाद में कुछ दूसरा चुनते और अपना फैसला बदलते तो उनका एनडीए में होना मुश्किल था। ऐसे में लोगों को कभी भी अपने ऊपर शक नहीं करना चाहिए और हर हालात में अपने फैसले पर टिके रहना चाहिए।
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