Bilkis Bano: '...पहाड़ के आकार का पत्थर सीने से हट गया', SC के फैसले पर बिलकिस के छलके खुशी के आंसू
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने गुजरात सरकार के आदेश को रद्द करते हुए बिलकिस बानो मामले के 11 दोषियों को दो सप्ताह के भीतर अधिकारियों के सामने सरेंडर करने के लिए कहा। कोर्ट ने उम्रकैद की सजा भुगत रहे 11 दोषियों को समय से पहले रिहा करने के गुजरात सरकार के फैसले को रद्द कर दिया।
कोर्ट के फैसले के बाद बिलकिस बानो ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। बानो ने कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है, जैसे "पहाड़ के आकार का पत्थर" उनके सीने से हटा दिया गया है और वह फिर से सांस ले सकती हैं। आइए जानते हैं आगे क्या बोलीं ?

बिलकिस बानो ने बयान में कहा कि आज सचमुच मेरे लिए नया साल है। मैंने राहत के आंसू रोए हैं। मैं डेढ़ साल से अधिक समय में पहली बार मुस्कुराई हूं। मैंने अपने बच्चों को गले लगाया है। ऐसा लगता है, मेरे सीने से जैसे पहाड़ के आकार का पत्थर उठा लिया गया हो। मैं फिर से सांस ले सकती हूं। यह न्याय जैसा महसूस होता है। मैं भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय को मुझे, मेरे बच्चों और हर जगह की महिलाओं को, सभी के लिए समान न्याय के वादे में यह पुष्टि और आशा देने के लिए धन्यवाद देती हूं।
दोषियों की रिहाई पर बिलकिस बानो का छलका दर्द
2022 में 11 दोषियों को रिहा किए जाने पर उन्हें कैसा महसूस हुआ, इस बारे में बात करते हुए बानो ने कहा कि डेढ़ साल पहले, 15 अगस्त, 2022 को जब दोषियों को समय से पहले रिहा कर दिया गया था, मैं बस ढह गई थी। उन्होंने कहा कि मुझे लगा कि मेरे साहस का भंडार खत्म हो गया है। जब तक लाखों एकजुटताएं मेरे रास्ते में नहीं आईं। भारत के हजारों आम लोग और महिलाएं आगे आईं।
'कांटों भरे सफर में पति और बच्चों ने दिया साथ'
संघर्ष से भरी कानूनी लड़ाई पर बानो ने कहा कि उनकी जैसी यात्राएं अकेले नहीं की जा सकतीं। हर मोड़ पर उनके पति और बच्चे उनके साथ थे। मेरे पास मेरे दोस्त हैं, जिन्होंने मुझे इतनी नफरत के समय में बहुत प्यार दिया। एडवोकेट शोभा गुप्ता भी मेरे इस 20 सालों से ज्यादा समय तक चले कांटों से भरे सफर में साथ चलती रहीं। उन्होंने मुझे न्याय के विचार में कभी आशा खोने नहीं दी।












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