आपराधिक केसों के मामले में बिहार नंबर वन, पश्चिम बंगाल में विशेष अदालत ने नहीं दिया एक भी फैसला
नई दिल्ली। राजनीति में अपराध से जुड़े कुछ आंकड़े सामने आए हैं। इनमें बिहार नंबर वन है, दूसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल और तीसरे नंबर पर केरल है। न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गठित की गई विशेष अदालतों में इस तरह के 1233 केस ट्रांसफर किए गए हैं। यह खुलासा केंद्र सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी से हुआ है। विशेष अदालतों का गठन जनप्रतिनिधियों के खिलाफ चल रहे केसों की जल्द से जल्द सुनवाई के लिए बनाई गई हैं। इनमें अब तक 136 मामलों पर फैसला आया है, जबकि 1097 पर सुनवाई चल रही है।

रिपोर्ट में बिहार से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां के जनप्रतिनिधियों के 260 केस विशेष अदालतों में भेजे गए हैं। बीते छह महीनों में 11 मामलों में फैसला आ चुका है, जबकि 249 केसों पर सुनवाई हो रही है। आपराधिक मामलों पर फैसलों के लिहाज से सबसे सुस्त पश्चिम बंगाल है। मार्च 2018 में यहां सांसद- विधायकों पर 215 केस चल रहे थे, लेकिन अब तक एक भी केस में फैसला नहीं आ सका है। जहां तक केरल की बात है तो रिपोर्ट में बताया गया है कि यहां 178 जनप्रतिनिधियों के केस चल रहे हैं, लेकिन इन केसों का क्या स्टेट्स है इस बारे में पूरी जानकारी नहीं दी गई है।
बिहार, केरल और पश्चिम बंगाल के बाद दिल्ली का नंबर आता है। दिल्ली में जनप्रतिनिधियों के खिलाफ 157 मामले विशेष अदालतों के पास पहुंचे, इनमें बीते छह महीने में 44 पर फैसला आ चुका है। दिल्ली में 45 अन्य मामले सेशन कोर्ट के पास हैं, इनमें से छह पर फैसला आ चुका है।
इसी प्रकार से कर्नाटक में जनप्रतिनिधियों के 142 मामले विशेष अदालतों को सौंपे गए, इनमें 19 पर फैसला आ चुका है। कर्नाटक के बाद आंध्र प्रदेश और तेलंगाना, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश का नंबर आता है। केंद्र सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, सांसद-विधायकों के केसों की सुनवाई के लिए 12 विशेष अदालतें गठित की गई हैं। इनमें से छह सेशन कोर्ट और पांच मजिस्ट्रेट कोर्ट हैं। गौरतलब है कि बीजेपी नेता और सुप्रीम कोर्ट वकील अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका पर केंद्र सरकार ने ये आंकड़े कोर्ट में पेश किए हैं। इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस रंजन गोगोई ने केंद्र सरकार को स्पेशल कोर्ट गठित करने और जरूरी बजट देने को कहा था।












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