बिहार में दलित वोट बैंक को लेकर क्यों आशंकित है JDU-RJD?

बिहार देश को पहला दलित मुख्यमंत्री देने वाला राज्य है। भोला पासवान शास्त्री 1968 में ही बिहार के सीएम बन गए थे। तब दलित राजनीति के सूरमा माने जाने वाले बसपा संस्थापक कांशीराम की दलित सियासत पैदा भी नहीं हुई थी।

उनके बाद 1980 के दशक की शुरुआत में एक और दलित नेता रामसुंदर दास को भी बिहार का मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला। लेकिन, जब से प्रदेश की राजनीति में मंडल आंदोलन से पैदा हुए नेताओं का दखल बढ़ा है, दलित नेताओं को पूरी तरह से सीएम वाला वह हैसियत नहीं मिल पाया।

bihar dalit politics

बिहार में दलित नेता और सीएम की कुर्सी
बीच में जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पहली बार भाजपा से मुंह फुलाया था, तब कुछ समय के लिए एक और दलित नेता हिंदुस्तान आवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतनराम मांझी को कुर्सी जरूर दे दी थी, लेकिन फिर उन्हें जिस अंदाज में कुर्सी से बेदखल किया गया था, वह बात भी बिहार की राजनीति के इतिहास में दर्ज है।

बिहार में दलितों की आबादी 19% से अधिक हो चुकी है
जब दलित नेताओं को सीएम की कुर्सी पर बिठाने के ये सारे प्रयोग चल रहे थे, तब माना जाता था कि बिहार में दलितों की आबादी 16% के आसपास है। लेकिन, 2 अक्टूबर को नीतीश सरकार ने जातीय जनगणना के जो आंकड़े जारी किए हैं, उसके मुताबिक अनुसूचित जातियों (SC) की कुल आबादी 19% से भी ज्यादा हो चुकी है। मतलब, जब आबादी के हिसाब से हिस्सेदारी की राजनीति की जा रही है तो दलित नेताओं और दलित वोटरों की उम्मीदें भी बढ़नी स्वाभाविक हैं।

जदयू-राजद ने शुरू किया दलित संपर्क अभियान
अब बिहार में सत्ताधारी महागठबंधन की दोनों प्रमुख पार्टियां नीतीश कुमार की जदयू और लालू यादव की राजद ने अलग-अलग तरीके से दलितों के बीच अपना जनाधार मजबूत करने की कोशिशों में जुट गई हैं। दोनों दल 2024 के लोकसभा चुनावों को देखते हुए अपने-अपने तरह से अुसूचित जातियों के वोटरों से संपर्क साधने में जुटे हैं।

शराब कानून ने कई दलित जातियों को किया नीतीश सरकार से नाराज
आरजेडी की कोशिश है कि लोकसभा चुनावों में दलित वोटर उसके उम्मीदवारों को वोट दे दें, यह किसी भी तरह से सुनिश्चित कर लिया जाए। वहीं नीतीश कुमार की पार्टी खासकर महादलितों के बीच अपने जनाधार को फिर से वापस पाने की कोशिशें कर रही है। नीतीश की असल चिंता शराब कानून है, जिसकी वजह से कुछ दलित जातियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हुआ है।

बीजेपी बनाती रही है शराबबंदी की वजह से लोगों के जेलों में बंद होने को मुद्दा
बीजेपी बार-बार आरोप लगाती रही है कि शराबबंदी कानून की सबसे बड़ी मार पिछड़ों (OBC),अति-पिछड़ों (MBC)के अलावा दलितों पर ही पड़ी है। इस कानून के उल्लंघन के आरोपों में वही सबसे ज्यादा जेलों में पड़े हुए हैं। नीतीश सरकार ने यह कानून तब लागू किया था, जब पिछली बार लालू की पार्टी के साथ उन्होंने सरकार बनाई थी।

दलितों पर आधारित मुख्य पार्टियां बीजेपी के साथ
बिहार में दलितों पर आधारित मुख्य तौर पर दो पार्टियां हैं। जीतनराम मांझी का 'हम' और दिवंगत केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (LJP)। एलजेपी के दो गुट हैं। आज की तारीख में ये तीनों ही पार्टियां बीजेपी के साथ हैं। इनमें जमुई लोकसभा क्षेत्र से सांसद और रामविलास के बेटे चिराग पासवान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कट्टर-विरोधी हैं। मांझी ने भी बड़े खिन्न मन से नीतीश का साथ छोड़ा है तो एलजेपी के दूसरे गुट के नेता और चिराग के चाचा पशुपति पारस भी जाति जनगणना के आंकड़ों पर गंभीर सवाल खड़े कर चुके हैं।

जेडीयू-आरजेडी ने दलितों के बीच शुरू की मेहनत
इन हालातों में जदयू और राजद का दलित वोटर संपर्क अभियान खास मायने रखता है। बीते 10 अक्टूबर के नीतीश ने पटना में अपने सरकारी आवास से भीम संसद रथों को हरी झंडी दिखाई थी। जेडीयू प्रवक्ता अंजुम आरा ने ईटी को बताया है, '5 नवंबर से पहले ये रथ राज्य के सभी 38 जिलों को कवर कर लेंगे। जेडीयू 5 नवंबर को (पटना के) वेटनरी कॉलेज ग्राउंड में 'भीम संसद' आयोजित करेगा।' यह मैदान सीएम नीतीश के आवास से कुछ ही दूरी पर है।

दलित वोटरों के बीच अपने जनाधार को मजबूत करने के लिए जदयू ने पहले 'भीम संवाद' शुरू किया था। फिर 'भीम संसद रथों' को रवाना किया गया और तीसरे चरण में भी 'भीम संसद' की तैयारी की गई है। जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार ने कहा, 'अनुसूचित जातियों के वोटरों के बीच हमारा जनाधार कायम है। हमारे कार्यकर्ता अनुसूचचित जाति के वोटरों के साथ लगातार संपर्क में रहते हैं।'

लालू यादव की पार्टी आरजेडी पंचायत स्तर पर पहले ही 'अंबेडकर परिचर्चा' कार्यक्रम आयोजित करवा चुकी है। राजद नेता और पूर्व मंत्री शिवचंदर राम ने कहा कि 'इस कार्यक्रम की सफलता के लिए हमने अपने सभी वरिष्ठ नेताओं और सारे विधायकों को शामिल किया। हमने अनुसूचित जातियों को यह याद दिलाया कि हमारी पार्टी के संस्थापक लालू प्रसाद ने ही, राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान निजी तौर पर उनके क्षेत्रों का दौरा शुरू किया था...।'

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+