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Bihar Politics: जेडीयू-आरजेडी में सीटें लगभग तय, कांग्रेस का भी जुगाड़, नीतीश के लिए बड़ा दिल दिखाएंगे लालू?

बिहार में महागठबंधन में शामिल मुख्य दलों जनता दल (यूनाइटेड) और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर डील लगभग तय है। जानकारी के मुताबिक दोनों बड़े सत्ताधारी दलों ने गठबंधन के अन्य सहयोगियों जैसे- कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों के लिए भी जुगाड़ निकाल लिया है।

जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया अलायंस या बिहार में महागठबंधन के बीच सीटों पर फैसला राज्य के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच आमने-सामने की बातचीत में अमूमन हो चुका है।

bihar seat sharing

लालू के संदेश पर मान गए नीतीश!
माना जा रहा है कि गुरुवार को इस सिलसिले में तेजस्वी यादव पिता और आरजेडीयू सुप्रीमो लालू यादव का संदेश लेकर मुख्यमंत्री के आवास पर पहुंचे थे।

'कुछ सीटों पर दोनों दल कर रहे हैं दावेदारी'
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक आरजेडीयू के एक बड़े नेता ने कहा है, 'वैसे सीट-शेयरिंग लगभग तय हो गया है और नेताओं की फोन पर बातचीत चल रही है, कुछ दिक्कतें हैं, जैसे कि कुछ सीटों पर आरजेडी और दोनों लड़ना चाहती हैं। यह मामला जल्द ही सुलझ जाएगा।'

जेडीयू-आरजेडी में 16-16 सीटों की डील!
उनके मुताबिक यह फॉर्मूला इस तरह से है कि आरजेडी और जेडीयू दोनों 16-16 सीटों पर लड़ेंगे। जबकि, कांग्रेस के लिए 5 और लेफ्ट के लिए 3 सीटें छोड़ी जाएंगी। उनका कहना है कि एक सीट ऊपर या नीचे हो सकती है। बिहार में लोकसभा की कुल 40 सीटें हैं।

नीतीश 17 सीटों पर अड़े थे-रिपोर्ट
महागठबंधन के एक नेता का कहना है, 'नीतीश 17 सीटों को लेकर अड़े हुए थे, क्योंकि 2019 के लोकसभा चुनाव में उनका जेडीयू इतनी ही सीटों पर लड़ा था और बीजेपी के साथ साझेदारी में 16 सीटें जीता था। अगर आरजेडी और जेडीयू दोनों 17 सीटों पर लड़ते हैं, लेफ्ट को 1 सीट पर ही समझौता करना पड़ सकता है।'

लालू ने नीतीश के प्रति दिखाई दरियादिली!
अगर लालू यादव ने तेजस्वी से नीतीश को 16-16 सीटों पर मान जाने का संदेश भिजवाया था, तो इसका मतलब है कि अपने सहयोगी के लिए राजद सुप्रीमो ने बड़ा दिल दिखाया है।

2019 में जेडीयू से ज्यादा सीटों पर लड़ा था राजद
क्योंकि, जेडीयू पिछली बार 17 सीटों पर लड़ा था तो, आरजेडी ने 20 सीटों पर अपना भाग्य आजमाया था। तब, भले ही आरजेडी को एक भी सीट नहीं मिली थी, लेकिन बीते पांच वर्षों में राज्य का राजनीतिक समीकरण बहुत बदल चुका है। 2020 के विधानसभा चुनाव में राजद सबसे बड़ा दल बन गया और जदयू बहुत भारी अंतर से तीसरे नंबर पर पिछड़ गई थी।

कांग्रेस के लिए भी निकल गया जुगाड़!
जहां तक कांग्रेस की बात है तो 2019 में राज्य में वह 9 सीटों पर लड़ी थी और महागठबंधन से एक सीट अकेले वही जीती थी। लेकिन, अबकी बार आरजेडी और जेडीयू उसे 5 सीटों को ऑफर दे सकते हैं; और पार्टी की जमीनी स्थिति अनुसार इतनी सीटों पर वह पार्टी मान भी सकती है।

वैसे कांग्रेस के एक नेता के मुताबिक, 'कम से कम 6 होना चाहिए। आरजेडी और जेडीयू के नेताओं को हमारी पार्टी के नेतृत्व से बात करने दीजिए। अभी तक सीट-शेयरिंग को लेकर कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है।' हालांकि, कम ज्यादा होना बहुत मुश्किल नहीं लग रहा है।

कुछ सीटों पर जेडीयू-आरजेडी दोनों जता रहा है दावेदारी
जहां तक नीतीश और लालू की पार्टी की बात है तो सीटों के तालमेल के करीब पहुंचने के बाद भी कुछ सीटों को लेकर दोनों के बीच में खींचतान बने रहने की जानकारी है।

यह वो सीटें हैं, जिसे राजद अपना गढ़ मानता है, लेकिन बीजेपी के साथ गठबंधन में पिछली बार जदयू जीत गया था। इस तरह की सीटों में जहानाबाद और झंझारपुर जैसी सीटों की चर्चा हो रही है।

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