Anand Mohan की रिहाई के आदेश पर भड़का IAS एसोसिएशन, तेजस्वी ने कहा- रिहाई कानूनी तरीके से

पूर्व सांसद Anand Mohan को जेल से रिहा कराने के लिए बिहार सरकार ने कुछ नियमों में बदलाव किए। अब आनंद मोहन की रिहाई का रास्ता साफ है। विवाद पर IAS एसोसिएशन ने लेटर लिखा है। तेजस्वी ने विवाद को गैरजरूरी बताया है।

anand mohan

Bihar Ex MP Anand Mohan की जेल से रिहाई के कारण चर्चा में है। बिहार सरकार ने जेल नियमावली में बदलाव किए हैं, जिसके बाद गैंगस्टर से सांसद बने आनंद मोहन को रिहा करने का रास्ता साफ हो गया है।

इस फैसले के खिलाफ सेंट्रल आईएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन ने लेटर लिखा है। Anand Mohan Release पर सवाल और विवाद को डिप्टी सीएम Tejashwi Yadav ने गैरजरूरी करार दिया है।

दरअसल, बिहार के सामाजिक और सियासी इतिहास में बाहुबली रहने के बाद आनंद मोहन संसद के लिए निर्वाचित हुए। आपराधिक इतिहास वाले नेता आनंद मोहन बिहार में जिलाधिकारी की हत्या के दोषी पाए गए थे।

पूर्व सांसद की जेल से रिहाई के मामले में सेंट्रल आईएएस एसोसिएशन ने निराशा जाहिर की है। गोपालगंज के पूर्व डीएम जी कृष्णैया की नृशंस हत्या के दोषियों को रिहा करने के बिहार सरकार के फैसले पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सेंट्रल आईएएस एसोसिएशन ने लेटर में लिखा है कि कैदियों के वर्गीकरण नियमों में बदलाव से गहरी निराशा हुई है। एसोसिएशन ने कहा, हम बिहार से पुरजोर अनुरोध करते हैं सरकार जल्द से जल्द अपने फैसले पर पुनर्विचार करे।

बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह सहित 27 दोषियों की रिहाई की अनुमति देने वाले जेल नियमों में संशोधन किया है। इस फैसले के बाद आनंद मोहन जेल से रिहा किए जाएंगे।

डिप्टी सीएम तेजस्वी ने आनंद मोहन की रिहाई के मामले में कहा, इसमें विवाद क्या है? उन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है और कानूनी रूप से रिहा हो रहे हैं। दिवंगत जिलाधिकारी की पत्नी उमा देवी ने कहा, आनंद मोहन की रिहाई राजपूत वोटर का समर्थ पाने के लिए हो रही है।

आनंद मोहन सिंह नीतीश कुमार के साथ समता पार्टी के सह-संस्थापकों में से एक थे। गैंगस्टर से नेता बने आनंद मोहन सिंह सहित 27 दोषियों की रिहाई के फैसले पर बिहार सरकार को भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

Recommended Video

    Bihar: पूर्व सांसद Anand Mohan पैरोल पर Jail से बाहर आए, Nitish Kumar पर क्या बोले? | वनइंडिया हिंदी
    • आनंद स्वतंत्र भारत में मौत की सजा पाने वाले पहले राजनेता थे।
    • राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने आनंद आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद को अपनी टिकट पर चुनाव लड़ाया।
    • 3 मई को देहरादून में चेतन की शादी होने वाली है। बीजेपी के नेता भी उन्हें शादी की बधाई देने के लिए आनंद से मिलते देखे गए हैं।

    बिहार पीपुल्स पार्टी (बीपीपी) के संस्थापक, आनंद मोहन सिंह पर 29 साल पहले के मॉब लिंचिग मामले में दोषी पाया गया था। 1994 में गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी जी कृष्णय्या की हत्या में आनंद मोहन को दोषी ठहराया गया था। BPP अब अस्तित्व में नहीं है।

    आनंद मोहन सिंह ने कथित रूप से भीड़ को उत्तेजित किया जिसमें जीकृष्णय्या की हत्या हुई। आनंद मोहन की पार्टी के एक अन्य गैंगस्टर-राजनेता छोटन शुक्ला के शव के साथ विरोध कर रही भीड़ ने कृष्णय्या पर हमला किया था।

    बिहार में विपक्षी दल भाजपा ने नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार पर आरोप लगाया है कि "सत्ता पर काबिज रहने के लिए आपराधिक सिंडिकेट की तरफ झुकाव" हो रहा है। राजपूतों में अभी भी आनंद का प्रभाव है। जिसे नजरअंदाज नहीं कर सकते।

    आनंद मोहन सिंह का एक परिचय स्वतंत्रता सेनानी राम बहादुर सिंह तोमर के पोते की भी है। 2007 में बिहार की एक निचली अदालत ने आनंद मोहन को मौत की सजा सुनाई थी।

    हालांकि, पटना उच्च न्यायालय में अपील के बाद आनंद मोहन की सजा आजीवन कारावास में बदली गई। इस फैसले को 2012 में सुप्रीम कोर्ट में भी चैलेंज किया गया, लेकिन शीर्ष अदालत ने भी पटना हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा।

    More From
    Prev
    Next
    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+