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Mamata Banerjee on Bihar Meat Ban: माछ-भात पर सियासत? बिहार के मांस बैन पर क्यों भड़क उठीं ममता बनर्जी

Mamata Banerjee on Bihar Meat Ban Order: बिहार सरकार के एक नए फैसले ने न केवल राज्य में, बल्कि पूरे देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। नीतीश कुमार सरकार ने शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता और नागरिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है।

बिहार में अब सार्वजनिक स्थानों पर खुले में मांस (Meat) बेचना प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस फैसले पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिससे यह मामला अब 'फूड पॉलिटिक्स' के बड़े विवाद में बदल गया है।

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हालांकि, सरकार इसे स्वच्छता से जोड़ रही है, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे 'खान-पान की आजादी' पर हमला करार दिया है।

Bihar Meat Sale Guidelines: बिहार की नई गाइडलाइन्स में क्या है?

उत्तर प्रदेश की तर्ज पर लिए गए इस फैसले के तहत अब बिहार के शहरी इलाकों में मांस की दुकानों को विशेष नियमों का पालन करना होगा। नई गाइडलाइन्स के अनुसार, कोई भी दुकानदार सार्वजनिक सड़कों या खुले बाजारों में मांस प्रदर्शित या बेच नहीं सकेगा। उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा और उनकी दुकानों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।

स्थानीय निकायों (नगर निगम/नगर पालिका) को आदेश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्रों में सघन मॉनिटरिंग करें और सुनिश्चित करें कि मांस की बिक्री कवर्ड यानी ढके हुए स्थानों पर ही हो। सरकार ने साफ किया है कि जो भी दुकान या विक्रेता नियमों का उल्लंघन करता पाया जाएगा, उस पर जुर्माने के साथ लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई भी हो सकती है।

Mamata Banerjee Slams Nitish Kumar: ममता बनर्जी का हमला- क्या लोग अब मॉल से मछली खरीदेंगे?

बिहार के इस फैसले पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ी आपत्ति जताई है। नबन्ना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने भाजपा और उनके सहयोगी दलों पर लोगों की भोजन संबंधी आदतों को नियंत्रित करने का आरोप लगाया। ममता बनर्जी ने कहा कि, क्या अब बाजारों में मछली और मांस नहीं बिकेगा? अगर भाजपा बंगाल में आई, तो वे यहाँ भी मछली-मांस बंद कर देंगे।

क्या लोग तब केवल शॉपिंग मॉल से मछली और मांस खरीदेंगे? मॉल तो सिर्फ अमीर जा सकते हैं, आम आदमी का क्या होगा? मैं इस तरह की राजनीति की कड़ी निंदा करती हूं। उन्होंने आगे कहा कि बंगाल की परंपरा 'माछ-भाथ' (मछली-चावल) की है और कोई भी राजनीतिक शक्ति यह तय नहीं कर सकती कि लोग क्या खाएंगे। उनके अनुसार, खान-पान एक व्यक्तिगत अधिकार है और इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।

'फूड पॉलिटिक्स' और क्षेत्रीय विविधता पर छिड़ी बहस

ममता बनर्जी ने एक बार फिर BJP पर 'फूड पॉलिटिक्स' करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले कपड़ों को लेकर और अब खाने को लेकर लोगों की आज़ादी पर हमला किया जा रहा है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि एक खास क्षेत्र की शाकाहारी आदतों को पूरे देश पर थोपने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा कि भारत एक विविधतापूर्ण देश है जहां हर राज्य की अपनी परंपराएं हैं, जिसका सम्मान किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, भाजपा लोगों के खाने और पहनने के अधिकारों में हस्तक्षेप कर रही है। उन्होंने इस बहस को आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा अनावश्यक राजनीतिक मुद्दा करार दिया।

चुनाव आयोग के मतदाता सूची पर गंभीर आरोप

इसी प्रेस ब्रीफिंग के दौरान ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर भी निशाना साधा। उन्होंने आयोग की कार्यशैली को "तुगलकी" करार देते हुए मतदाता सूची (Voter List) में गड़बड़ी के आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि तकनीक का इस्तेमाल कर लाखों वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अलग-अलग राज्यों के लिए दस्तावेजों के नियम अलग क्यों हैं? सीएम बनर्जी ने इसे एक प्रकार का "थ्रेट कल्चर" बताते हुए कहा कि बार-बार वोटर वेरिफिकेशन के मैसेज भेजकर नागरिकों में भ्रम फैलाया जा रहा है।

बिहार सरकार के इस फैसले का असर आने वाले दिनों में पड़ोसी राज्यों के चुनावों पर भी देखने को मिल सकता है। जहां एक तरफ सरकार इसे 'हाइजीन' और 'सिविक ऑर्डर' की दिशा में जरूरी कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे ध्रुवीकरण की राजनीति से जोड़कर देख रहा है।

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